जब किसी m द्रव्यमान के कण पर बल $F_1, F_2, F_3 $ इस प्रकार कार्य कर रहे हैं कि $F_2$ तथा $F_3$ परस्पर लंबवत हैं, तो कण स्थिर रहता है। यदि अब बल $F_1$ हटा दिया जाए तो कण का त्वरण है
यहाँ $ F_1 = F_2 +F_3 $ $ \therefore a = { F_1 \over a } $
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जब किसी m द्रव्यमान के कण पर बल $F_1, F_2, F_3 $ इस प्रकार कार्य कर रहे हैं कि $F_2$ तथा $F_3$ परस्पर लंबवत हैं, तो कण स्थिर रहता है। यदि अब बल $F_1$ हटा दिया जाए तो कण का त्वरण है
यहाँ $ F_1 = F_2 +F_3 $ $ \therefore a = { F_1 \over a } $
भुजा l के समबाहु त्रिभुज के आकार की एक कुंडली किसी स्थायी चुंबक के ध्रुव खंडों के बीच इस प्रकार लटकाई गई है कि $ \vec B $ कुंडली के तल में है। यदि त्रिभुज में धारा I के कारण उस पर बल आघूर्ण $ \tau $ कार्य करता है, तो त्रिभुज की भुजा l है
$ In \triangle CAD $ $ AC^2 = AD^2 + DC^2 $ $ l^2 = { l^2 \over 4 } + DC^2 $ $ DC = { \sqrt 3 \over 2 } l $ $ Area of \triangle ABC $ $ A = {1 \over 2 } (l) \left( {\sqrt 2 \over 2 }l \right) $ $ A = { 1 \over 4 } \sqrt 3 l^2 $ $ torques acting on \triangle ABC is $ $ \tau = IAB sin \theta $ $ = I \left( {1 \over 4 } \sqrt 3 l^2 \right) B sin ^\circ $ $ \theta = 90 ^\circ $ $ \tau = { \sqrt 3 \over 4 } I l^2 B $ $ \therefore l^2 = - { 4 \tau \over \sqrt 3 I B } $ $ \therefore l^2 = { 4 \tau \over \sqrt 3 I B } $ $ \therefore l = 2 \left ({ \tau \over \sqrt I B } \right) ^{1/2 } $
N फेरों वाली एक कुंडली सर्पिल के रूप में कसकर लपेटी गई है जिसकी आंतरिक तथा बाह्य त्रिज्याएँ क्रमशः "a" तथा "b" हैं। जब कुंडली से धारा I प्रवाहित होती है, तो केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र है ...............
$ No. of turns per unit width = { N \over b-a} $ $ \therefore the no.of turns in thickness dx is dN = \left( N \over b-a\right) dx $ $ \therefore mag. field at the centre is dB = dN \left( \mu_o I \over 2x \right) $ $ dB = \left( {N \over b-a} \right) { \mu_o I \over 2x} .dx $ $ \therefore mag.field B = \int dB$ $ = { \mu_o NI \over 2 (b-a) } n \left( { n \over a } \right) $
किसी छोटे छड़ चुंबक के अक्ष पर बिंदु x पर चुंबकीय क्षेत्र, उसी चुंबक के निरक्ष पर बिंदु y पर के बराबर है। चुंबक के केंद्र से x तथा y की दूरियों का अनुपात है
$ on the axis B_1 = { 2m \over x^3 } $ $ on the equator B_2 = { M \over y^3 } $ $ As B_1 = B_2 $ $ { 2M \over x^3 } = { M \over y^3 } $ $ { x^3 \over y^3 } = 2 $ $ { x \over y } = 2 ^ { 1 \over 3 } $
0.1 m लंबाई तथा ध्रुव प्रबलता $ 10^ { -4 } A.m $ वाला एक चुंबक 30 टेस्ला के चुंबकीय क्षेत्र में $30 ^ \circ $ के कोण पर रखा गया है। उस पर कार्य करने वाला बल युग्म है…………. $ \times 10^ {-4 } $ जूल।
$ \tau = MB sin \theta $ $ = m ( 2l ) \times B sin \theta $ $ = 10^{-4} \times 0.1 \times 39 sin ^\circ $ $ = 1.5 \times 10^{-4} J $
किसी स्थान पर नति कोण का वास्तविक मान $60^ \circ $ है, चुंबकीय याम्योत्तर के साथ $ 30^ \circ $ के कोण पर झुके तल में आभासी नति है।
$ tan \phi ' = { tan \phi \over cos \beta } $ $where \phi' = Apparent angle of dip $ $ = { tan 60 ^ \circ \over cos 60 ^ \circ } $ $ \phi = True angle of dip $ $ tan \phi' = 2 $ $ \beta = Angle made by vertical plane with magnetic meridian $ $ \phi' = tan^{-1} (2) $
एक नति सूई प्रारंभ में चुंबकीय याम्योत्तर में होती है जब वह किसी स्थान पर नति कोण दर्शाती है। नति वृत्त को क्षैतिज तल में कोण x से घुमाया जाता है और तब वह नति कोण $ \theta ' $ दर्शाती है। तब $ { tan \theta' \over tan \theta } $
प्रारंभ में नति कोण ($\theta$) की स्पर्शज्या $\tan \theta$ दी गई है। जब नति वृत्त को क्षैतिज तल में कोण $x$ से घुमाया जाता है, तो नया नति कोण $\theta'$ होता है। गोलीय निर्देशांकों में त्रिकोणमितीय संबंध के अनुसार, नति कोण की नई स्पर्शज्या $\tan \theta' = \frac{\tan \theta}{\cos x}$ के रूप में निरूपित की जा सकती है। अतः $\frac{\tan \theta'}{\tan \theta} = \frac{1}{\cos x}$।
एक नति सूई चुंबकीय याम्योत्तर के लंबवत ऊर्ध्वाधर तल में कंपन करती है। कंपन का आवर्तकाल 2 sec पाया जाता है। फिर उसी सूई को क्षैतिज तल में कंपन करने दिया जाता है और आवर्तकाल पुनः 2 sec पाया जाता है। तब नति कोण है
$ in vertical plane T = \sqrt [2 \pi] { I \over MB_V} .......(1)$ $ in horizontal plane T = \sqrt [2 \pi] { I \over MB_H} ........(2)$ परंतु दोनों स्थितियों में T = 2 sec $ \sqrt { I \over MB_V } = \sqrt { I \over MB_H} $ $ { 1 \over B_V} = { 1 \over B_H} $ $ 1 = { B_V \over B_H } $ $ 1 = tan \phi $ $ \phi = 45 ^ \circ $
दो सर्वसम छोटे छड़ चुंबक, प्रत्येक का चुंबकीय आघूर्ण M है, क्षैतिज तल में एक-दूसरे के लंबवत अक्षों के साथ 2d की दूरी पर रखे गए हैं। उनके ठीक बीच के बिंदु पर चुंबकीय प्रेरण है।
$ B_{ 1 axis } = { \mu_o \over 4 \pi } { 2M \over d^3 } ........(1) $ $B_{ 2 equator } = { \mu_o \over 4 \pi } { M \over d^3 }.......(2) $ बिंदु P पर $ B_{ resultant} = \sqrt { B_1^2 + B_2 ^2 } $ $ = \sqrt 5 { \mu_o \over 4 \pi } { M \over d^3 } $
किसी अनुचुंबकीय पदार्थ की चुंबकीय प्रवृत्ति $ - 73 \circ C $ पर 0.0060 है, तो $-173 ^ \circ $ C पर उसका मान होगा
$ Magentic suspectibility x_m \alpha { 1 \over T } $ $ { x_{m2} \over x_{m1}} = { T_1 \over T_2 } $ $ { x_{m2} \over 0.0060} = { 273 - 73 \over 273 - 173 } $ $ { X_{m2} \over 0.0060} = {200 \over 100 } $ $ X_{m2} = 0.0120 $
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