किसी धातु की फलक-केंद्रित घनीय एकक कोष्ठिका में उपस्थित परमाणुओं का कुल आयतन है ( r परमाणु त्रिज्या है):
(D) कोष्ठिका में परमाणुओं का आयतन = 4/3 r3 x n (fcc के लिए n = 4)
= 4/3 x r3 x 4 = 16/3 r3
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किसी धातु की फलक-केंद्रित घनीय एकक कोष्ठिका में उपस्थित परमाणुओं का कुल आयतन है ( r परमाणु त्रिज्या है):
(D) कोष्ठिका में परमाणुओं का आयतन = 4/3 r3 x n (fcc के लिए n = 4)
= 4/3 x r3 x 4 = 16/3 r3
CsCl की एकक कोष्ठिका का द्रव्यमान किसके तुल्य है:-
(c) bcc संरचना वाली CsCl की एकक कोष्ठिका में कोनों पर 8 परमाणु तथा केंद्र पर एक परमाणु होता है।
अतः Cl की संख्या- = 8x1/8 =1 तथा Cs की संख्या+ =1x1=1
अतः प्रति एकक कोष्ठिका CsCl इकाइयों की संख्या = 1
p-प्रकार का अर्धचालक प्राप्त करने के लिए सिलिकॉन को निम्नलिखित में से किस तत्व से डोपित करना चाहिए?
(d) n-प्रकार के अर्धचालक तब प्राप्त होते हैं जब Si या Ge को वर्ग 15 के तत्वों, जैसे आर्सेनिक (As), से डोपित किया जाता है, जबकि p-प्रकार के अर्धचालक तब प्राप्त होते हैं जब Si या Ge को वर्ग 13 के तत्वों, अर्थात् इंडियम (In), बोरॉन (B), की सूक्ष्म मात्रा से डोपित किया जाता है।
नोट : ताप बढ़ने के साथ अर्धचालकों की चालकता बढ़ती है
गैस तापमापी में प्रयुक्त गैस है:
गैस (अधिमानतः हाइड्रोजन या हीलियम) को एक काँच या संगलित-क्वार्ट्ज़ बल्ब में बंद किया जाता है जो पारद दाबमापी से जुड़ा होता है।
निम्नलिखित में से किस परिघटना की व्याख्या बोर के परमाणु मॉडल द्वारा नहीं की जा सकी?
NCERT पाठ के अनुसार: 'बोर का मॉडल चुंबकीय क्षेत्र (ज़ीमान प्रभाव) या विद्युत क्षेत्र (स्टार्क प्रभाव) की उपस्थिति में स्पेक्ट्रमी रेखाओं के विपाटन की व्याख्या करने में भी असमर्थ था।' विकल्प 1, 2 और 4 ऐसी परिघटनाएँ हैं जिनकी व्याख्या बोर के मॉडल ने हाइड्रोजन-सदृश परमाणुओं के लिए सफलतापूर्वक की।
बोर का मॉडल निम्नलिखित में से किस परमाणु स्पीशीज़ पर लागू नहीं होता?
NCERT पाठ स्पष्ट कहता है: 'बोर का मॉडल केवल हाइड्रोजन-सदृश (एक-इलेक्ट्रॉन) परमाणुओं पर लागू होता है। इसे हीलियम जैसे दो-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं तक भी नहीं बढ़ाया जा सकता।' $H$, $He^+$ और $Li^{2+}$ सभी हाइड्रोजन-सदृश (एक-इलेक्ट्रॉन) स्पीशीज़ हैं, जबकि $He$ में दो इलेक्ट्रॉन हैं।
बोर के मॉडल की एक मूलभूत सीमा रासायनिक आबंधों द्वारा अणुओं के बनने की व्याख्या न कर पाना थी। इससे किस विषय की समझ की कमी का पता चलता है?
NCERT पाठ में उल्लेख है: 'यह परमाणुओं की रासायनिक आबंधों द्वारा अणु बनाने की क्षमता की व्याख्या नहीं कर सका।' यह सीधे इस बात से जुड़ा है कि परमाणु कैसे अन्योन्यक्रिया और आबंधन करते हैं, जिसमें अंतरापरमाणुक बल और संयोजी इलेक्ट्रॉनों का व्यवहार शामिल है।
बोर का मॉडल हाइज़ेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत का विरोध कैसे करता है?
NCERT पाठ के अनुसार: 'कक्षा एक स्पष्ट रूप से परिभाषित पथ है और यह पथ तभी पूर्णतः परिभाषित हो सकता है जब इलेक्ट्रॉन की सटीक स्थिति और सटीक वेग दोनों एक ही समय पर ज्ञात हों। हाइज़ेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार यह संभव नहीं है।' अतः निश्चित कक्षाएँ परिभाषित करके बोर का मॉडल अनिश्चितता सिद्धांत का विरोध करता है।
बोर के मॉडल को 'अर्ध-चिरसम्मत' कहा जाता है क्योंकि इसमें समाहित हैं:
NCERT पाठ के अनुसार: 'चिरसम्मत भौतिकी के कुछ पहलुओं और आधुनिक भौतिकी के कुछ पहलुओं पर आधारित बोर का अर्ध-चिरसम्मत मॉडल भी सरलतम हाइड्रोजन-सदृश परमाणुओं का सही चित्र प्रस्तुत नहीं करता।'
बोर के मॉडल को बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं पर लागू करते समय इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन अन्योन्यक्रियाएँ एक गंभीर समस्या क्यों उत्पन्न करती हैं?
NCERT पाठ में उल्लेख है: 'इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन विद्युत बल अन्योन्यक्रिया परिमाण में इलेक्ट्रॉन-नाभिक विद्युत बल के तुलनीय है, क्योंकि आवेश और दूरियाँ समान कोटि के हैं। यही कारण है कि ग्रह-सदृश इलेक्ट्रॉन वाला बोर का मॉडल बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं पर लागू नहीं होता।'
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