आवेश वाहकों की गतिशीलता ($\mu$) परिभाषित की जाती है:
एक महत्त्वपूर्ण राशि गतिशीलता $\mu$ है जिसे प्रति एकांक विद्युत क्षेत्र अपवाह वेग के परिमाण के रूप में परिभाषित किया जाता है: $\mu = |v_d| / E$। (NCERT, समीकरण 3.24, पृष्ठ 89)
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आवेश वाहकों की गतिशीलता ($\mu$) परिभाषित की जाती है:
एक महत्त्वपूर्ण राशि गतिशीलता $\mu$ है जिसे प्रति एकांक विद्युत क्षेत्र अपवाह वेग के परिमाण के रूप में परिभाषित किया जाता है: $\mu = |v_d| / E$। (NCERT, समीकरण 3.24, पृष्ठ 89)
ताँबे के एक तार पर विचार कीजिए। यदि धारा और इलेक्ट्रॉन घनत्व नियत रखते हुए उसका अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल बढ़ा दिया जाए, तो इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग का क्या होगा?
धारा I, $I = neA|v_d|$ द्वारा दी जाती है। यदि I, n और e नियत हों, तो $A|v_d|$ नियत रहना चाहिए। अतः यदि A बढ़े, तो नियत गुणनफल बनाए रखने के लिए $|v_d|$ घटना चाहिए। (NCERT, समीकरण 3.18, पृष्ठ 86 से व्युत्पन्न)
किरचॉफ का प्रथम नियम, जिसे संधि नियम भी कहते हैं, किस भौतिक राशि के संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है?
संदर्भ कहता है: 'किरचॉफ का संधि नियम आवेश के संरक्षण पर आधारित है और किसी संधि पर बाहर जाने वाली धाराओं का योग आने वाली धारा के बराबर होता है।' यह संधि नियम को सीधे आवेश संरक्षण से जोड़ता है।
किरचॉफ के लूप नियम के अनुसार, किसी विद्युत परिपथ में किसी भी बंद लूप के चारों ओर विभव में परिवर्तनों का बीजगणितीय योग क्या होता है?
संदर्भ कहता है: 'लूप नियम: प्रतिरोधकों और सेलों वाले किसी भी बंद लूप के चारों ओर विभव में परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है (चित्र 3.15)।' यह लूप नियम का सीधा कथन है।
किरचॉफ के नियम लागू करते समय, जब किसी धारा 'I' को आरंभ में एक दिष्ट तीर से अंकित किया जाता है, और गणना के बाद 'I' ऋणात्मक निकलती है, तो इसका क्या अर्थ है?
संदर्भ कहता है: 'यदि अंततः I धनात्मक निकले, तो प्रतिरोधक में वास्तविक धारा तीर की दिशा में है। यदि I ऋणात्मक निकले, तो धारा वास्तव में तीर के विपरीत दिशा में बहती है।'
विद्युत वाहक बल (emf) $e$ और आंतरिक प्रतिरोध $r$ वाले किसी सेल के लिए, यदि धारा $I$ सेल के भीतर ऋणात्मक टर्मिनल (N) से धनात्मक टर्मिनल (P) की ओर बहती है, तो विभवांतर $V = V(P) - V(N)$ क्या है?
संदर्भ उल्लेख करता है: '$V = V(P) – V(N) = e – I r$ [समीकरण (3.38), धनात्मक टर्मिनल P और ऋणात्मक टर्मिनल N के बीच; यहाँ I सेल के भीतर N से P की ओर बहने वाली धारा है]।'
किरचॉफ का संधि नियम लागू करते समय, यह कथन कि 'किसी संधि पर या किसी लाइन के किसी बिंदु पर आवेशों का संचय नहीं होता' मुख्यतः नियम के किस पहलू को न्यायसंगत ठहराता है?
संदर्भ समझाता है: 'इस नियम का प्रमाण इस तथ्य से मिलता है कि जब धाराएँ स्थायी होती हैं, तो किसी संधि पर या किसी लाइन के किसी बिंदु पर आवेशों का संचय नहीं होता। अतः अंदर बहने वाली कुल धारा (जो संधि में आवेश के प्रवाह की दर है) बाहर बहने वाली कुल धारा के बराबर होनी चाहिए।'
किरचॉफ के नियमों को 'विद्युत परिपथों के विश्लेषण के लिए बहुत उपयोगी' माना जाता है, क्योंकि:
संदर्भ कहता है: 'प्रतिरोधकों के श्रेणी और समांतर संयोजनों के लिए पहले व्युत्पन्न सूत्र परिपथ में सभी धाराओं और विभवांतरों को निर्धारित करने के लिए सदैव पर्याप्त नहीं होते। किरचॉफ के नियम कहलाने वाले दो नियम विद्युत परिपथों के विश्लेषण के लिए बहुत उपयोगी हैं।'
यदि धाराएँ $I_1$ और $I_2$ किसी संधि में प्रवेश करती हैं, और $I_3$ संधि से निकलती है, तो किरचॉफ के संधि नियम के अनुसार इन धाराओं के बीच सही संबंध क्या है?
संदर्भ कहता है: 'संधि नियम: किसी भी संधि पर, संधि में प्रवेश करने वाली धाराओं का योग संधि से निकलने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है (चित्र 3.15)। उदाहरण के लिए, चित्र 3.15 में I3 = I1 + I2 दर्शाया गया है, जहाँ I3 प्रवेश करती है और I1, I2 निकलती हैं।
किसी सेल के लिए जहाँ विभवांतर $V = e + Ir$ सत्य है, धारा $I$ को सेल के धनात्मक (P) और ऋणात्मक (N) टर्मिनलों के सापेक्ष किस प्रकार बहती हुई माना जाता है?
संदर्भ कहता है: 'यदि सेल से होकर धारा I को अंकित करते समय P से N की ओर जाएँ, तो निश्चय ही $V = e + I r$ (3.60)।'
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