रेडियोसक्रियता का S.I. मात्रक है
(d) रेडियोसक्रियता का S.I. मात्रक Becqueral है
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रेडियोसक्रियता का S.I. मात्रक है
(d) रेडियोसक्रियता का S.I. मात्रक Becqueral है
एक रेडियोधर्मी नाभिक एक बीटा कण उत्सर्जित करता है। जनक और संतति नाभिक हैं
(d) -कण () उत्सर्जित करने के बाद नाभिक का द्रव्यमान नहीं बदलता।
एक नाभिक एक -कण उत्सर्जित करता है। परिणामी नाभिक एक कण उत्सर्जित करता है। अंतिम नाभिक की संगत परमाणु और द्रव्यमान संख्या होगी
(a)
एक रेडियोधर्मी तत्व का 99% क्षय होगा
(a)
n का मान 6 और 7 के बीच आता है।
यदि कोई रेडियोधर्मी पदार्थ 40 दिनों में अपने मूल द्रव्यमान के तक कम हो जाता है, तो इसकी अर्ध-आयु क्या है?
(a)
इसके अलावा
एक रेडियोधर्मी पदार्थ के नमूने में, एक माध्य जीवनकाल के दौरान प्रारंभिक सक्रिय नाभिकों का कितना प्रतिशत क्षय होगा?
(b) अक्षयित शेष नाभिकों की संख्या
क्षयित नाभिकों की संख्या =
=
एक रेडियोधर्मी पदार्थ की प्रारंभिक मात्रा 16 ग्राम है। 120 दिनों के बाद यह घटकर 1 ग्राम रह जाता है, तो रेडियोधर्मी पदार्थ की अर्ध-आयु है
(b)
साथ ही
समीकरण दर्शाता है-
(a) यह एक है क्योंकि परमाणु क्रमांक (Z) एक से बढ़ जाता है।
जब कोई रेडियोधर्मी पदार्थ एक -कण उत्सर्जित करता है, तो आवर्त सारणी में उसका स्थान नीचे चला जाता है
(b)
की अर्धायु 100 है। के एक नमूने की रेडियोसक्रियता को उसके प्रारंभिक मान के 1/16वें भाग तक क्षय होने में लगा समय है
(a) किसी नमूने की रेडियोसक्रियता चार अर्धायुओं में उसके प्रारंभिक मान के भाग तक क्षय हो जाती है।
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