द्रव्यमान m का कोई पिंड पृथ्वी की सतह से ऊँचाई h = R/5 तक ऊपर उठता है, जहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या है। यदि g पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण है, तो स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि है
(c)
प्रतिस्थापित करने पर
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द्रव्यमान m का कोई पिंड पृथ्वी की सतह से ऊँचाई h = R/5 तक ऊपर उठता है, जहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या है। यदि g पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण है, तो स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि है
(c)
प्रतिस्थापित करने पर
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(d)
'g' अर्थात् गुरुत्व का मान ध्रुवों पर अधिक होता है क्योंकि गुरुत्वीय खिंचाव ध्रुवों पर अधिकतम होता है तथा विषुवत रेखा की ओर आने पर घटता है।
उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र से पलायन करने के लिए दी जाने वाली आवश्यक गतिज ऊर्जा तथा उपग्रह को पृथ्वी के वायुमंडल के ठीक ऊपर वृत्ताकार कक्षा में गति करने के लिए दी जाने वाली आवश्यक गतिज ऊर्जा का अनुपात है
(b) उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र से पलायन करने के लिए आवश्यक गतिज ऊर्जा
उपग्रह को वृत्ताकार कक्षा में गति करने के लिए आवश्यक गतिज ऊर्जा
इन दोनों ऊर्जाओं का अनुपात = 2
पृथ्वी की सतह से 120 km ऊपर वृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करता एक अंतरिक्ष यात्री एक चम्मच अंतरिक्ष यान से धीरे से गिरा देता है। चम्मच
(c) अंतरिक्ष यान से गिराए जाने पर चम्मच का वेग कक्षीय वेग के
बराबर होगा।
दो सर्वसम उपग्रह A तथा B किसी ग्रह P के चारों ओर क्रमशः 4R तथा R त्रिज्या वाली वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं। यदि उपग्रह A की चाल 3V है, तो उपग्रह B की चाल क्या होगी ?
(b)
निम्नलिखित में से सही कथन चुनिए : किसी भूस्थिर उपग्रह की कक्षा की त्रिज्या किस पर निर्भर करती है -
(d)
कोई उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर त्रिज्या r की वृत्ताकार कक्षा में चाल v से गति कर रहा है। यदि कक्षा की त्रिज्या 1% घटा दी जाए, तो उसकी चाल
(b)
चाल में % वृद्धि = (त्रिज्या में % कमी)
अर्थात् चाल 0.5% बढ़ेगी
पृथ्वी की सतह के निकट पृथ्वी के उपग्रह का कक्षीय वेग 7 km/s है। जब कक्षा की त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या की 4 गुना हो, तो उस कक्षा में कक्षीय वेग है
(a) यदि कक्षीय त्रिज्या 4 गुना हो जाए तो कक्षीय वेग
आधा हो जाएगा। अर्थात्
सूर्य से पृथ्वी की अधिकतम तथा न्यूनतम दूरियाँ तथा हैं, सूर्य से खींचे गए कक्षा के दीर्घ अक्ष के लंबवत होने पर सूर्य से उसकी दूरी
(c) पृथ्वी सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय पथ में गति करती है। अतः दीर्घवृत्त के गुणों का उपयोग करके
जहाँ a = अर्ध दीर्घ अक्ष
b = अर्ध लघु अक्ष
e = उत्केंद्रता
अब अभीष्ट दूरी = अर्ध नाभिलंब=
=
कल्पना कीजिए कि कोई हल्का ग्रह किसी अत्यंत भारी तारे के चारों ओर त्रिज्या R की वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमण काल T के साथ परिक्रमा कर रहा है। यदि ग्रह तथा तारे के बीच गुरुत्वीय आकर्षण बल के अनुक्रमानुपाती है, तो किसके अनुक्रमानुपाती है
(b) ग्रह की परिक्रमा के लिए अभिकेंद्री बल गुरुत्वीय आकर्षण बल द्वारा प्रदान किया जाता है
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