भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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काँच तथा जल के निरपेक्ष अपवर्तनांक 3/2 तथा 4/3 हैं। काँच तथा जल में प्रकाश के वेग का अनुपात होगा

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Explanation

3μ  1V  1λ  1Cμ1μ2 = V2V13/24/3 = V2V1 = 98V1V2 = 89

There  is an equi-convex glass lens with radius of each face as R and μga=32 and μwa=43. If there is water in object space and air in image space, then the focal length is :

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त्रिज्या R वाले किसी समोत्तल लेंस के लिए, फोकस दूरी f = R/(μg - μw) द्वारा दी जाती है, जहाँ μg तथा μw क्रमशः काँच तथा जल के अपवर्तनांक हैं। दिए गए मान रखने पर, हमें f = (3/2)R प्राप्त होता है।

कोई अंतरिक्ष यात्री 400 km की ऊँचाई पर किसी अंतरिक्ष यान से पृथ्वी की सतह को नीचे देख रहा है। यह मानते हुए कि अंतरिक्ष यात्री की पुतली का व्यास 5 mm है तथा दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य 500 nm. है। अंतरिक्ष यात्री लगभग किस आकार की रैखिक वस्तु का विभेदन कर सकेगा 

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 (c)  xr=1.22 λdx=1.22 λrd=1.22×500×10-9×400×1035×10-3=50 m

पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 3.8×105 km है। आँख 5500 Å तरंगदैर्ध्य के प्रकाश के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील है। चंद्रमा पर दो बिंदुओं के बीच वह न्यूनतम पृथकन जिसका विभेदन 500 cm दूरदर्शी द्वारा किया जा सकता है, होगा 

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(a)   चूँकि विभेदन सीमा
  θ=1Resolving Power(RP);

तथा यदि x चंद्रमा की सतह पर बिंदुओं के बीच दूरी है जो दूरदर्शी से दूरी r पर है।

  θ=xr
   θ=1RP=xr x=rRP=rd/1.22λx=1.22 λrd

  =1.22×5500×10-10×3.8×108500×10-2=51 m

अपवर्तक कोण 10° वाला कोई पतला प्रिज़्म अपवर्तनांक 1.42 के काँच से बना है। यह प्रिज़्म अपवर्तनांक 1.7 के काँच के किसी अन्य पतले प्रिज़्म के साथ संयोजित किया जाता है। यह संयोजन बिना विचलन के वर्ण-विक्षेपण उत्पन्न करता है। दूसरे प्रिज़्म का अपवर्तक कोण होना चाहिए 

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(b) बिना विचलन के वर्ण-विक्षेपण के लिए, प्रिज़्मों के संयोजन द्वारा उत्पन्न कुल विचलन शून्य होना चाहिए।

माना, पहले तथा दूसरे प्रिज़्म के प्रिज़्म कोण क्रमशः A1  and A2 हैं। इसी प्रकार, उनके अपवर्तनांक μ1 and μ2 हैं।

बिना विचलन के वर्ण-विक्षेपण की शर्त है 

  δ1-δ2=0

   μ1-1A1-μ2-1A2=0

  A2=μ1-1μ2-1A1=1.42-11.7-110°

  A2=6°

दो तरंगदैर्ध्यों λ1=4000 A o and λ2=6000 Ao के लिए किसी प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमताओं का अनुपात है 

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(c) चूँकि, सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता, 

  RP1λwavelenght   RP1RP2=λ1λ2=60004000=32

स्तंभ 1 की संगत प्रविष्टियों को स्तंभ 2 से मिलाइए। [जहाँ m दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन है]

स्तंभ 1  स्तंभ 2 
A. m=-2  a. उत्तल दर्पण   
B. m=-1/2  b. अवतल दर्पण
C. m=+2  c. वास्तविक प्रतिबिंब
D. m=+1/2  d. आभासी प्रतिबिंब

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(d) अवतल दर्पण वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिंब बनाता है, जिनका आवर्धन वस्तु की स्थिति के अनुसार ऋणात्मक अथवा धनात्मक हो सकता है। यदि वस्तु फोकस तथा ध्रुव के बीच रखी जाए तो  प्राप्त प्रतिबिंब आभासी होगा तथा उसका आवर्धन धनात्मक होगा। अन्य सभी स्थितियों में अवतल दर्पण वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है जिनका आवर्धन ऋणात्मक होगा। उत्तल दर्पण सदैव आभासी प्रतिबिंब बनाता है जिसका आवर्धन सदैव धनात्मक होगा।


किसी सामान्य नेत्र के लिए, नेत्र का कॉर्निया 40 D की अभिसारी क्षमता प्रदान करता है तथा कॉर्निया के पीछे नेत्र लेंस की न्यूनतम अभिसारी क्षमता 20 D है। इस सूचना का उपयोग करते हुए, दृष्टिपटल तथा कॉर्निया-नेत्र लेंस के बीच दूरी का अनुमान लगाया जा सकता है

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(c)

Given:P1=40DP2=20DPnet=40+20=60DFocal length=1P=160m=10060=1.67cm

किसी दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता 9 है। जब उसे समांतर किरणों के लिए समायोजित किया जाता है तो अभिदृश्यक तथा नेत्रिका के बीच दूरी 20cm है। लेंसों की फोकस दूरियाँ हैं 

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दिया है, M=f0fe=9 and f0+fe=20

  f0=9fe

अतः,  9fe+fe=20

  fe=2cm

  f0=9×2

  f0=18cm

किसी उभयोत्तल लेंस की वक्रता त्रिज्या का परिमाण 20 cm है। निम्नलिखित विकल्पों में से कौन-सा लेंस से 30 cm दूर रखी 2 cm ऊँचाई की किसी वस्तु के बने प्रतिबिंब का सर्वोत्तम वर्णन करता है?

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सामान्यतः हमने माना है μ=1.5

अतः, f=20 cm

  1f=1v+1u120=1v+1301v=120-130=160v=60 cm 

  hiho=vuhi=12×|ho|hi=4 cm

यहाँ, प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा, आवर्धित है तथा प्रतिबिंब की ऊँचाई 4 cm है।

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Frequently Asked Questions

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