भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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तापमान T (केल्विन) तथा द्रव्यमान m पर भारी जल के साथ ऊष्मीय साम्य में किसी न्यूट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य है 

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(b) विचार प्रक्रिया किसी गतिमान कण से संबद्ध डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य इस प्रकार दी जा सकती है 

 λ=hp=h2m(K.E)

ऊष्मीय साम्य पर, न्यूट्रॉन तथा भारी जल का तापमान समान होगा। यह उभयनिष्ठ तापमान T के रूप में दिया गया है। साथ ही, हम जानते हैं कि, किसी कण की गतिज ऊर्जा 

  KE=p22m

    जहाँ, p=कण का संवेग 

 m=कण का द्रव्यमान

न्यूट्रॉन की गतिज ऊर्जा है 

  KE=32kT

  न्यूट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य 

  λ=hp=h2m(K.E)

   =h2m×32kT=h3mkT

डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य λ वाले द्रव्यमान m के इलेक्ट्रॉन किसी X-किरण नलिका में लक्ष्य पर गिरते हैं। उत्सर्जित X-किरण की कट-ऑफ तरंगदैर्ध्य λ0 है -

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(a) मुख्य विचार

कट-ऑफ तरंगदैर्ध्य तब उत्पन्न होती है जब कोई आपतित इलेक्ट्रॉन टक्कर में अपनी संपूर्ण ऊर्जा खो देता है। यह ऊर्जा X-किरणों के रूप में प्रकट होती है।

दिया है, इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान=m

    डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य=λ

अतः, इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा = p22m

  =12mhλ2=h22mλ2

अब, किसी फोटॉन की अधिकतम ऊर्जा इस प्रकार दी जा सकती है-

E=hcλ0=h22mλ2λ0=hc×2λ2mh2        = 2mcλ2h

 

जब किसी धात्विक पृष्ठ को तरंगदैर्ध्य λ के विकिरण से प्रदीप्त किया जाता है, तो निरोधी विभव V है। यदि उसी पृष्ठ को तरंगदैर्ध्य 2λ के विकिरण से प्रदीप्त किया जाए, तो निरोधी विभव V4 है। धात्विक पृष्ठ के लिए देहली तरंगदैर्ध्य है:

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(c) प्रथम स्थिति में, जब किसी धात्विक पृष्ठ को तरंगदैर्ध्य λ के विकिरण से प्रदीप्त किया जाता है, तो निरोधी विभव V है।

अतः, प्रकाशविद्युत समीकरण इस प्रकार लिखा जा सकता है

  eV=hcλ-hcλο  ...(i)

द्वितीय स्थिति में, जब उसी पृष्ठ को तरंगदैर्ध्य 2λ के विकिरण से प्रदीप्त किया जाता है, तो निरोधी विभव V4 है। अतः, प्रकाशविद्युत समीकरण इस प्रकार लिखा जा सकता है

  eV4=hc2λ-hcλ0

                eV=4hc2λ-4hcλ0      ...(ii)

समी. (i) तथा (ii) से हमें प्राप्त होता है

              hcλ-hcλ0=4hc2λ-4hcλο              1λ-1λο=  2λ-  4λο                 λ0=3λ    

कोई 200W सोडियम स्ट्रीट लैंप तरंगदैर्ध्य 0.6 μm. का पीला प्रकाश उत्सर्जित करता है। यह मानते हुए कि वह विद्युत ऊर्जा को प्रकाश में परिवर्तित करने में 25% दक्ष है, वह प्रति सेकंड जितने पीले प्रकाश के फोटॉन उत्सर्जित करता है उनकी संख्या है 

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दक्ष शक्ति P =Nt×hcλ=200×0.25

  Nt=50×λhc=1.5×1020

  = 50×0.6×10-66.6×10-34×3×108

कोई αकण 0.25 Wb/m2. के चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति में त्रिज्या 0.83 cm के वृत्ताकार पथ में गति करता है। कण से संबद्ध डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य होगी 

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हम जानते हैं

  R=mvqB

तथा λ=hmv

  λ=hqBR

  =6.6×10-342×1.6×10-19×0.83×10-2×0.25

  =0.01 A0

यदि किसी इलेक्ट्रॉन का संवेग

p से बदला जाए, तो उससे संबद्ध डी-ब्रॉग्ली

तरंगदैर्ध्य 0.5% बदल जाती है। 

इलेक्ट्रॉन का प्रारंभिक संवेग होगा

 

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डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य

  λ=hp

यहाँ  λλ=pp

  0.5100=PpiPi=1000.5pPi=200p

द्रव्यमान M का कोई रेडियोऐक्टिव नाभिक आवृत्ति ν

का एक फोटॉन उत्सर्जित करता है तथा नाभिक प्रतिक्षिप्त होता है।

प्रतिक्षेप ऊर्जा होगी:

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फोटॉन का संवेग

  p=c

अतः, प्रतिक्षेप ऊर्जा

  E=P22ME=c22M

अथवा  h=h2ν22Mc2

 

कार्य फलन 1.8 eV वाली किसी धातु से प्रकाशविद्युत

उत्सर्जन प्रक्रिया में, सर्वाधिक ऊर्जावान इलेक्ट्रॉनों

की गतिज ऊर्जा 0.5 eV है। संगत

निरोधी विभव है

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निरोधी विभव= अधिकतम गतिज ऊर्जा

  eV=KEmax

अतः, विकल्प (b) सही है।

 

दो भिन्न आवृत्तियों का प्रकाश जिनके

फोटॉनों की ऊर्जाएँ क्रमशः 1 eV तथा 2.5 eV

हैं, किसी धात्विक पृष्ठ को 

जिसका कार्य फलन 0.5 eV है, क्रमशः प्रदीप्त करता है।

उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम चालों 

का अनुपात होगा

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गतिज ऊर्जा

  KE=ϕ-ϕ0

यहाँ, KE1=1-0.5=0.5 eVKE2=2.5-0.5=2 eV

अतः,  KE1KE2=0.52=14

अथवा   v12v22=14

अथवा   v1v2=14=12

किसी इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉन 25 kV की वोल्टता द्वारा त्वरित किए जाते हैं। यदि वोल्टता बढ़ाकर 100 kV कर दी जाए तो इलेक्ट्रॉनों से संबद्ध डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य

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हमारे पास है

  λ=12.27V

अतः,  λ1λ2=V2V1λ2=λ1V1V2λ2=λ125100λ2=λ114=λ12

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