भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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यदि किसी तंत्र को चलाने वाले ऊर्जा स्रोत की आवृत्ति उसकी प्राकृतिक आवृत्ति के निकट हो, तो दोलन के आयाम पर क्या प्रभाव पड़ता है?

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पाठ अनुनाद की व्याख्या करता है, 'यदि ऐसे तंत्र को किसी ऊर्जा स्रोत द्वारा प्राकृतिक आवृत्ति के निकट की आवृत्ति पर चलाया जाए, तो दोलन का आयाम बड़ा पाया जाता है।'

$L = 1.00 \text{ mH}$ और $C = 1.00 \text{ nF}$ वाले एक श्रेणी LCR परिपथ पर विचार कीजिए। इसकी अनुनादी कोणीय आवृत्ति क्या है?

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अनुनादी कोणीय आवृत्ति $\omega_0 = 1/\sqrt{LC}$ द्वारा दी जाती है। दिया है $L = 1.00 \text{ mH} = 1.00 \times 10^{-3} \text{ H}$ और $C = 1.00 \text{ nF} = 1.00 \times 10^{-9} \text{ F}$। अतः, $\omega_0 = 1/\sqrt{(1.00 \times 10^{-3}) \times (1.00 \times 10^{-9})} = 1/\sqrt{1.00 \times 10^{-12}} = 1/(1.00 \times 10^{-6}) = 1.00 \times 10^6 \text{ rad/s}$।

श्रेणी LCR परिपथ में, यदि $R = 100 \Omega$, $L = 1.00 \text{ mH}$ और $C = 1.00 \text{ nF}$, तथा आरोपित वोल्टता आयाम $v_m = 100 \text{ V}$ है, तो अनुनाद पर शिखर धारा ($i_m$) क्या है?

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अनुनाद पर, शिखर धारा $i_m = v_m/R$। दिया है $v_m = 100 \text{ V}$ और $R = 100 \Omega$। अतः, $i_m = 100 \text{ V} / 100 \Omega = 1 \text{ A}$। दिया गया पाठ इन मानों के लिए विशेष रूप से यह भी कहता है: 'चूँकि अनुनाद पर $i_m = v_m/R$, स्थिति (i) के लिए धारा आयाम स्थिति (ii) के लिए धारा आयाम का दुगुना है।'

अनुनाद पर श्रेणी LCR परिपथ में धारा और वोल्टता के बीच कला संबंध है:

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अनुनाद पर, $X_L = X_C$, जिसका अर्थ है $(X_L - X_C) = 0$। $\tan \phi = (X_L - X_C)/R$ से हमें $\tan \phi = 0$ प्राप्त होता है, अतः $\phi = 0$। इसका तात्पर्य है कि धारा और वोल्टता समान कला में हैं।

चुंबकीय फ्लक्स के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा सही SI मात्रक है?

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NCERT पाठ के अनुसार, 'चुंबकीय फ्लक्स का SI मात्रक वेबर (Wb) या टेस्ला मीटर वर्ग ($T m^2$) है।'

चुंबकीय फ्लक्स एक अदिश राशि है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में रखे क्षेत्रफल A के पृष्ठ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स ($\Phi_B$) को सही परिभाषित करता है?

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NCERT कहता है, 'एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में रखे क्षेत्रफल A के पृष्ठ से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स $\Phi_B = B \cdot A = BA \cos \theta$ के रूप में परिभाषित है', जहाँ $\theta$ B और A के बीच का कोण है। अदिश गुणनफल एक अदिश राशि को दर्शाता है।

10 cm त्रिज्या, 500 फेरों और 2 $\Omega$ प्रतिरोध की एक वृत्ताकार कुंडली को $3.0 \times 10^{-5}$ T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत तल में रखा गया है। यदि कुंडली को अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः 0.25 s में 180° घुमाया जाए, तो कुंडली से गुजरने वाला प्रारंभिक चुंबकीय फ्लक्स क्या है?

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NCERT पाठ में दिए गए उदाहरण से, 'कुंडली से गुजरने वाला प्रारंभिक फ्लक्स, $\Phi_B$ (प्रारंभिक) = BA cos $\theta$ = $3.0 \times 10^{-5} \times (\pi \times 10^{-2}) \times \cos 0° = 3\pi \times 10^{-7}$ Wb'। चूँकि तल क्षेत्र के लंबवत है, क्षेत्रफल सदिश और B के बीच कोण $\theta$ 0° है।

फैराडे के प्रेरण के नियमों के अनुसार किसी कुंडली में emf कब प्रेरित होता है?

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NCERT कहता है, 'फैराडे के प्रेरण के नियमों का तात्पर्य है कि N फेरों वाली कुंडली में प्रेरित emf उससे गुजरने वाले फ्लक्स के परिवर्तन की दर से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है'। साथ ही, 'फैराडे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि जब किसी कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स समय के साथ बदलता है तो कुंडली में emf प्रेरित होता है।'

फैराडे के प्रेरण के नियम ($\varepsilon = -dN\Phi_B/dt$) में ऋणात्मक चिह्न क्या दर्शाता है?

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NCERT कहता है, 'लेंज का नियम कहता है कि प्रेरित emf की ध्रुवता ऐसी होती है कि यह ऐसी धारा उत्पन्न करने की प्रवृत्ति रखती है जो उसे उत्पन्न करने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन का विरोध करती है। फैराडे के नियम के व्यंजक में ऋणात्मक चिह्न इस तथ्य को इंगित करता है।'

यदि N फेरों वाली कुंडली के एक फेरे से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स $\Phi_B$ है, तो फ्लक्स समय के साथ बदलने पर कुंडली में प्रेरित कुल emf क्या है?

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सारांश में दिए गए फैराडे के प्रेरण के नियमों के अनुसार, 'N फेरों वाली कुंडली में प्रेरित emf उससे गुजरने वाले फ्लक्स के परिवर्तन की दर से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है, $\varepsilon = -Nd\Phi_B/dt$'। यहाँ $\Phi_B$ कुंडली के एक फेरे से संबद्ध फ्लक्स है।

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