भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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यदि दोलन करने वाले कण पर कार्य करने वाले बल में x², x³ आदि के समानुपाती अतिरिक्त पद हों, तो दोलक को वर्गीकृत किया जाएगा:

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पाठ समझाता है: 'वास्तविक संसार में बल में x², x³ आदि के समानुपाती छोटे अतिरिक्त पद हो सकते हैं। इन्हें तब अरैखिक दोलक कहते हैं।' (NCERT, पृष्ठ 267)

सरल आवर्त गति को दो समतुल्य तरीकों से परिभाषित किया जा सकता है। एक विस्थापन समीकरण x(t) = A cos(ωt + φ) द्वारा। दूसरा समतुल्य तरीका क्या है?

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संदर्भ कहता है: 'अब तक की चर्चा को संक्षेप में कहें तो, सरल आवर्त गति को दो समतुल्य तरीकों से परिभाषित किया जा सकता है, या तो विस्थापन के लिए समीकरण (13.4) द्वारा या समीकरण (13.13) द्वारा जो इसका बल नियम देता है।' समीकरण (13.13) है F(t) = -kx(t)। (NCERT, पृष्ठ 267)

बल नियम F(t) = -kx(t) से विस्थापन समीकरण x(t) व्युत्पन्न करने के लिए करना पड़ता है:

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संदर्भ उल्लेख करता है: 'समीकरण (13.4) से समीकरण (13.13) तक जाने के लिए हमें दो बार अवकलन करना पड़ा। इसी प्रकार, बल नियम समीकरण (13.13) का दो बार समाकलन करके हम समीकरण (13.4) पुनः प्राप्त कर सकते हैं।' (NCERT, पृष्ठ 267)

SHM करने वाले स्प्रिंग-द्रव्यमान निकाय के लिए, यदि स्प्रिंग नियतांक 'k' समान रहते हुए द्रव्यमान 'm' बढ़ाया जाए, तो कोणीय आवृत्ति ω:

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पाठ में दिए गए सूत्र ω = √(k/m) (समीकरण 13.14b) से, यदि 'm' बढ़ता है और 'k' नियत रहता है, तो ω घटेगी। (NCERT, पृष्ठ 267)

'm' द्रव्यमान का एक पिंड 'k' स्प्रिंग नियतांक वाले दो समरूप स्प्रिंगों से जुड़ा है, जो स्थिर आधारों के बीच द्रव्यमान के साथ समांतर क्रम में जुड़े हैं। यदि द्रव्यमान को विस्थापित किया जाए, तो नेट प्रत्यानयन बल F होगा:

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उदाहरण 13.6 में, जब दो समरूप स्प्रिंग (स्प्रिंग नियतांक k) स्थिर आधारों के साथ द्रव्यमान 'm' से इस प्रकार जुड़े हैं कि एक स्प्रिंग 'x' से दीर्घित और दूसरा संपीडित होता है, तो बल F₁ = -kx और F₂ = -kx हैं। नेट बल F = F₁ + F₂ = -2kx। (NCERT, पृष्ठ 268)

उदाहरण 13.6 में वर्णित अनुसार जुड़े, 'k' स्प्रिंग नियतांक वाले दो समरूप स्प्रिंगों से जुड़े द्रव्यमान 'm' के दोलन का आवर्तकाल क्या है?

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उदाहरण 13.6 में नेट प्रत्यानयन बल F = -2kx है। इसकी F = -K_eff x से तुलना करने पर प्रभावी स्प्रिंग नियतांक K_eff = 2k मिलता है। दोलन का आवर्तकाल T = 2π√(m/K_eff)। K_eff = 2k प्रतिस्थापित करने पर T = 2π√(m/2k) मिलता है। (NCERT, पृष्ठ 268)

आवर्त दोलक की कुल यांत्रिक ऊर्जा E = ½kA² द्वारा दी जाती है। यह ऊर्जा:

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संदर्भ कहता है: 'आवर्त दोलक की कुल यांत्रिक ऊर्जा इस प्रकार समय से स्वतंत्र है, जैसा कि किसी भी संरक्षी बल के अंतर्गत गति के लिए अपेक्षित है।' (NCERT, पृष्ठ 269)

SHM में किस अवस्था पर स्थितिज ऊर्जा अधिकतम और गतिज ऊर्जा शून्य होती है?

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पाठ स्पष्ट करता है: 'x = 0 के लिए ऊर्जा गतिज है; चरम x = ± A पर यह पूर्णतः स्थितिज ऊर्जा है।' चरम स्थितियों पर वेग शून्य होता है, अतः गतिज ऊर्जा शून्य और स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है। (NCERT, पृष्ठ 269)

SHM में कण के लिए कोणीय आवृत्ति (ω), स्प्रिंग नियतांक (k) और द्रव्यमान (m) के बीच क्या संबंध है?

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पाठ संबंध को स्पष्ट रूप से ω = √(k/m) (13.14b) बताता है। यह SHM का एक महत्वपूर्ण सूत्र है। (NCERT, पृष्ठ 267)

SHM के बल नियम के अनुसार, यदि विस्थापन 'x' धनात्मक हो, तो प्रत्यानयन बल 'F' होगा:

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बल नियम है F(t) = -kx(t)। यदि x धनात्मक है, तो F = -k(धनात्मक मान), जिसका परिणाम ऋणात्मक बल है। यह इंगित करता है कि बल विस्थापन के विपरीत दिशा में, माध्य स्थिति की ओर कार्य करता है। (NCERT, पृष्ठ 267-268)

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