किसी पूर्णतः आवेशित संधारित्र की धारिता ‘C’ है। उसे विशिष्ट ऊष्मा धारिता ‘s’ तथा द्रव्यमान ‘m’ के किसी ऊष्मारोधी गुटके में अंतःस्थापित प्रतिरोध तार की छोटी कुंडली से निरावेशित किया जाता है। यदि गुटके का तापमान ‘ΔT’ बढ़ जाता है, तो धारिता के बीच विभवांतर ‘V’ है
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