केप्लर का तीसरा नियम कहता है कि सूर्य के चारों ओर किसी ग्रह के परिक्रमण के आवर्तकाल (T) का वर्ग, सूर्य और ग्रह के बीच की औसत दूरी r के तीसरे घात के समानुपाती होता है, अर्थात T2=Kr3, यहाँ K स्थिरांक है। यदि सूर्य और ग्रह के द्रव्यमान क्रमशः M और m हैं, तो न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार उनके बीच आकर्षण बल F=GMm/r2 है, यहाँ G गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक है। G और K के बीच संबंध को इस प्रकार वर्णित किया गया है
ग्रह और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण आकर्षण बल अभिकेंद्र बल प्रदान करता है
अर्थात =mv2/r =>v=
ग्रह का आवर्तकाल होगा
T=2πr/v =>T2==...(i)
साथ ही केप्लर के तीसरे नियम से
T2=Kr3 ...(ii)
समीकरण (i) और (ii) से, हमें प्राप्त होता है
=Kr3
=>GMK=4π2