भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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किसी निश्चित पदार्थ के तार को धीरे-धीरे दस प्रतिशत खींचा जाता है। उसका नया प्रतिरोध तथा विशिष्ट प्रतिरोध क्रमशः हो जाते हैं 

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मुख्य विचार: खींचने में, विशिष्ट प्रतिरोध अपरिवर्तित रहता है।  खींचने के बाद,  विशिष्ट प्रतिरोध(ρ) समान रहेगा। तार का मूल प्रतिरोध, 

  R=plA

अथवा   RlA or Rl2V  (as V=Al)

तथा R'l+10%l2V

अतः,R'R=l+10100l2l2

अथवा  R'R=11l210l2=121100

अथवा R'=1.21 R

प्रतिरोध 1000 Ω का कोई वोल्टमीटर पूर्ण-पैमाना विक्षेप देता है जब उससे 100 mA धारा बहती है। उसे पूर्ण-पैमाना विक्षेप पर 1 A पढ़ने वाले अमीटर के रूप में उपयोग करने के लिए उसके सिरों पर आवश्यक शंट प्रतिरोध है :

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iig=1+GS का उपयोग करने पर

i100×103=1+1000S

S=10009=111Ω 

n फेरों तथा त्रिज्या r वाले किसी तार, जो धारा i वहन करता है, के तल के अभिलंबवत क्षेत्र कुंडली की अक्ष पर कुंडली के केंद्र से छोटी दूरी h पर मापा जाता है। यह केंद्र पर क्षेत्र से जिस भिन्न द्वारा छोटा है वह है

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(a)  केंद्र पर क्षेत्र  B1=μ04π×2πinr=μ02·nir

  केंद्र से दूरी पर क्षेत्र

  B2=μ04π·2πnir2(r2+h2)3/2=μ02·nir2r31+h2r23/2     =B11+h2r2-3/2 =B11-32·h2r2

  (द्विपद प्रमेय द्वारा)

  अतः B2 की तुलना B1 से करने पर वह भिन्न =32h2r2 से कम है

लंबाई 2.1 cm तथा चौड़ाई 1.25 cm की 250-फेरों वाली आयताकार कुंडली 85μA की धारा वहन करती है तथा 0.85 T सामर्थ्य के चुंबकीय क्षेत्र के अधीन है। बल आघूर्ण के विरुद्ध कुंडली को 180 घुमाने के लिए किया गया कार्य है 

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(a) कुंडली को घुमाने के लिए किया गया कार्य

  W=MB(cosθ1-cosθ2

जहाँ, M=चुंबकीय आघूर्ण 

  B=चुंबकीय क्षेत्र 

 

दिया है.  θ1=O, θ2=180

  W=MB(cos 0°-cos180°

  = 2MB=2×NIA×B

  =2×250×85×10-61.25×2.1×10-4×85×10-2

  =9.1 μJ (लगभग)

 

 

 

निकटतम विकल्प (a) है।

किसी छड़ चुंबक को किसी एकसमान क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र में पतले सूती धागे से लटकाया जाता है तथा वह साम्य अवस्था में है। उसे 60o घुमाने के लिए आवश्यक ऊर्जा W है। अब चुंबक को इस नई स्थिति में रखने के लिए आवश्यक बल आघूर्ण है:

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बल आघूर्ण = MBsinθ 
= MB sin600  -------(1) 
चुंबक को कोण θ1 से θ2 तक विस्थापित करने में किया गया कार्य है -
W = MB(cosθ1 – cosθ2
W = MB(1 – cos600)  -------(2) 
(1) तथा (2) से 
बल आघूर्ण=3W212=3W

लंबाई 2.1 cm तथा चौड़ाई 1.25 cm की 250-फेरों वाली आयताकार कुंडली 85μकी धारा वहन करती है तथा 0.85 T सामर्थ्य के चुंबकीय क्षेत्र के अधीन है। बल आघूर्ण के विरुद्ध कुंडली को 180° घुमाने के लिए किया गया कार्य है:

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दी गई है लंबाई 2.1 cm तथा चौड़ाई 1.25 cm की एक आयताकार कुंडली 
कुंडली से धारा = 85 μA 
फेरों की संख्या = 250 
B= 0.85 T 
किया गया कार्य, W= MBcosθ1-cosθ2 
जब उसे कोण 1800 से घुमाया जाता है तब 
W= MBcos00-cos1800=MB1+1=2MB 
W = 2(NIA)B 
W=2×250×85×10-61.25×2.1×10-4×85×10-2

W=9.8 μJ

चुंबकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है

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(d) जैसा कि हम पदार्थ की चुंबकीय पारगम्यता तथा प्रवृत्ति के बीच संबंध जानते हैं अर्थात्

  μr=1+xm    ...(i)

अतः, प्रतिचुंबकीय पदार्थों के लिए, μr<1

अतः, समीकरण (i) के अनुसार, प्रतिचुंबकीय पदार्थ की चुंबकीय प्रवृत्ति (xm) ऋणात्मक होगी।

जबकि अनु तथा लौहचुंबकीय पदार्थों की स्थिति में, चुंबकीय प्रवृत्ति धनात्मक होती है।

चुंबकीय आघूर्ण 0.4 JT-1 का कोई छोटा छड़ चुंबक 0.16 T. के किसी एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा गया है। चुंबक स्थायी साम्य में है जब स्थितिज ऊर्जा है

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हम जानते हैं कि 

  U=-MB cos θ

   स्थायी साम्य के लिए θ=0°

   अतः, U=-MB

  =-(0.4)(0.16)=-0.064 J

चुंबकीय याम्योत्तर में रखे किसी कंपन चुंबकत्वमापी में एक छोटा छड़ चुंबक है। चुंबक पृथ्वी के 24 μT के क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र में 2s के आवर्तकाल के साथ दोलन करता है। जब किसी धारावाही तार को रखकर पृथ्वी के क्षेत्र के विपरीत 18 μT का क्षैतिज क्षेत्र उत्पन्न किया जाता है, तो चुंबक का नया आवर्तकाल होगा

 

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कंपन चुंबकत्वमापी में आवर्तकाल

  T=2πIM×BH

  T1BH

  T1T2=(BH)2(BH)1

  2T2=624

  T = 4s

n फेरों तथा प्रतिरोध RΩ वाली कोई कुंडली प्रतिरोध 4 के किसी धारामापी से जोड़ी जाती है। यह संयोजन t सेकंड के समय में चुंबकीय क्षेत्र W1 weber/m2 से W2 weber/m2 तक गति कराया जाता है। परिपथ में प्रेरित धारा है 

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i=eR=NR(ϕ2ϕ1)Δt=n(W2W1)5Rt 

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Frequently Asked Questions

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