भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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किसी स्थिर हाइड्रोजन परमाणु का इलेक्ट्रॉन पाँचवें ऊर्जा स्तर से मूल स्तर तक जाता है। फोटॉन उत्सर्जन के परिणामस्वरूप परमाणु द्वारा अर्जित वेग होगा

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Explanation

1λ=R1n12-1n22 Here n1=1 and n2=5Hence 1λ=R112-152 =2425RNow photon energy-E=hcλ=2425hcRHere the momentum of photon=momentum of atomThus P=Ec=2425hRVelocity of atom v=Pm=24hR25m

हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन के प्रथम उत्तेजित अवस्था से मूल अवस्था में कूदने पर उत्सर्जित एकवर्णी विकिरण किसी प्रकाशसंवेदी पदार्थ को विकिरित करता है। निरोधी विभव 3.57 V मापा जाता है। पदार्थ की देहली आवृत्ति है:

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इलेक्ट्रॉन के उत्सर्जन से मुक्त ऊर्जा

  E=-3.4--13.6

  =10.2 eV

प्रकाशविद्युत समीकरण से।

कार्य फलन

   ϕ=E-eV=hv

   v=E-eVh

  =10.2-3.57e6.67×10-34

v=6.63×1.6×10-196.67×10-34

=1.6×1015Hz

हाइड्रोजन परमाणु के लिए लाइमन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्ध्य किसी हाइड्रोजन-सदृश आयन के लिए बामर श्रेणी की द्वितीय रेखा की तरंगदैर्ध्य के बराबर है। हाइड्रोजन-सदृश आयन की परमाणु संख्या Z है 

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H-आयन के लिए लाइमन श्रेणी

  hcλ=Rhc112-122

तथा H-सदृश आयन के लिए 

  hcλ=Z2Rhc122-142

112-122=Z214-116          1-14=Z214-116                      Z=2

मूल अवस्था में किसी हाइड्रोजन परमाणु की ऊर्जा -13.6 eV है। प्रथम उत्तेजित अवस्था में किसी He+ आयन की ऊर्जा होगी 

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मुख्य क्वांटम संख्या n वाले किसी परमाणु की ऊर्जा E इस प्रकार दी जाती है E=-13.6n2Z2 प्रथम उत्तेजित अवस्था के लिए n=2 तथा He+ Z=2 के लिए

           E=-13.6×2222

  =-13.6 eV

ऊर्जा 12mv2 का कोई अल्फा नाभिक आवेश Ze के किसी भारी नाभिकीय लक्ष्य पर बमबारी करता है। तो अल्फा नाभिक के लिए निकटतम पहुँच की दूरी किसके अनुक्रमानुपाती होगी

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द्रव्यमान m का कोई αकण प्रारंभिक वेग v रखता है, जब वह परमाणु संख्या Z वाले किसी परमाणु के नाभिक से बहुत दूर होता है। निकटतम पहुँच की दूरी पर, αकण की गतिज ऊर्जा पूर्णतः स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। गणितीय रूप से,

  12mv2=14πε02eZer0

  r0=14πε02Ze212mv2

किसी रदरफोर्ड प्रकीर्णन प्रयोग में जब आवेश Z1 तथा द्रव्यमान M1 का कोई प्रक्षेप्य आवेश Z2 तथा द्रव्यमान M2, के किसी लक्ष्य नाभिक के निकट पहुँचता है तो निकटतम पहुँच की दूरी r0 है। प्रक्षेप्य की ऊर्जा है 

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द्रव्यमान M1 तथा आवेश z1 का कोई कण प्रारंभिक वेग u रखता है, जब वह परमाणु संख्या z2 वाले किसी परमाणु के नाभिक से बहुत दूर होता है। निकटतम पहुँच की दूरी पर, कण की गतिज ऊर्जा पूर्णतः स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। गणितीय रूप से, 

  12M1u2=14πε0z1z2r0

अतः कण की ऊर्जा z1z2 के अनुक्रमानुपाती है।

मूल अवस्था में हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की आयनन ऊर्जा 13.6 eV है। परमाणु 6 तरंगदैर्ध्यों का विकिरण उत्सर्जित करने के लिए उच्च ऊर्जा स्तरों तक उत्तेजित किए जाते हैं। उत्सर्जित विकिरण की अधिकतम तरंगदैर्ध्य किस संक्रमण के संगत है

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इलेक्ट्रॉन के nth कक्षा से निम्न कक्षा में संक्रमण के कारण प्राप्त वर्णक्रमी रेखाओं की संख्या है 

N = nn-12 तथा अधिकतम तरंगदैर्ध्य के लिए श्रेणी की कक्षाओं के बीच अंतर न्यूनतम होना चाहिए।

वर्णक्रमी रेखाओं की संख्या N = nn-12

              nn-12=6

अथवा  n2-n-12=0

अथवा  n-4n+3=0

अथवा  n=4

अब चूँकि श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्ध्य अधिकतम होती है, अतः इलेक्ट्रॉन 4th कक्षा से तीसरी कक्षा में कूदता है।

 

हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था ऊर्जा -13.6 eV है। जब उसका इलेक्ट्रॉन प्रथम उत्तेजित अवस्था में होता है, तो उसकी उत्तेजन ऊर्जा है:

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उत्तेजन ऊर्जा वह ऊर्जा है जो इलेक्ट्रॉन को मूल स्तर की कक्षा से किसी उच्च कोटि की कक्षा (अर्थात्, n= 2, 3, 4...) तक ले जाने के लिए आवश्यक होती है

दिया है, हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था ऊर्जा 

  E1=-13.6 eV

प्रथम उत्तेजित अवस्था (अर्थात्, n=2) में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा

  E2=-13.622eV

अतः, उत्तेजन ऊर्जा

  E=E2-E1

  =-13.64--13.6

  =-3.4+13.6=10.2eV

तरंगदैर्ध्य 5000 Å के प्रकाश के किसी फोटॉन की ऊर्जा लगभग 2.5 eV है। इस प्रकार तरंगदैर्ध्य 1Å के किसी X-किरण फोटॉन की ऊर्जा होगी 

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(c) E1λ2.5E'=15000E'=2.5×5000 eV

लाइमन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्ध्य λ है। बामर श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्ध्य है

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(d) लाइमन श्रेणी की प्रथम रेखा के लिए λL1=43R  ..... (i)
बामर श्रेणी की प्रथम रेखा के लिए λB1=365R  ..... (ii)
समीकरण (i) तथा (ii) से

λB1λL1=275λB1=275λL1λB1=275λ

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Frequently Asked Questions

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