भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

भौतिक विज्ञान (Physics) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

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हाइड्रोजन (H), ड्यूटीरियम (D), एकल आयनित हीलियम तथा द्विआयनित लिथियम सभी के नाभिक के चारों ओर एक इलेक्ट्रॉन है। n =2 से n = 1 संक्रमण पर विचार कीजिए। उत्सर्जित विकिरणों की तरंगदैर्ध्य क्रमशः λ1,λ2,λ3 तथा λ4 हैं। तो लगभग 

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(a) EZ2 का उपयोग करने पर  ( n1 तथा n2 समान हैं)

hcλZ2λZ2= constant

λ1Z12=λ2Z22=λ3Z32=λ4Z42

λ1×1=λ2×12=λ3×22=λ4×33λ1=λ2=4λ3=9λ4

किसी प्रोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन के बीच विद्युत विभव V=V0lnrr0 द्वारा दिया जाता है जहाँ r0 एक नियतांक है। बोर के मॉडल को लागू मानते हुए, rn का n के साथ परिवर्तन लिखिए, जहाँ n मुख्य क्वांटम संख्या है

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(a) स्थितिज ऊर्जा U=eV=eV0lnrr0 
 बल F=-dUdr=eV0r .
 यह बल आवश्यक अभिकेंद्री बल प्रदान करेगा। अतः mv2r=eV0rv=eV0m …..(i)
तथा mvr=nh2π  …..(ii)
समीकरण (i) तथा (ii) से mr=nh2πmeV0  अथवा r ∝ n

कोई मुक्त न्यूट्रॉन क्षय होकर एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन तथा एक बनाता है 

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पॉली ने सुझाव दिया कि β-कण (इलेक्ट्रॉन) के उत्सर्जन के बाद किसी नाभिक में एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन में परिवर्तित हो जाता है तथा इस अभिक्रिया में एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रतिन्यूट्रिनो (ν) बनते हैं। यह अभिक्रिया इस प्रकार निरूपित की जाती है

     n10       H11  + β0-1  +  ν¯(neutron)     (Proton) (Electron) (Antineutrino)

प्रतिन्यूट्रिनो एक ऐसा कण है जिसका द्रव्यमान नगण्य है तथा जिस पर कोई आवेश नहीं होता।

ध्यान दें:-

β-कण के उत्सर्जन के बाद, किसी नाभिक में कणों की कुल संख्या (द्रव्यमान-संख्या) अपरिवर्तित रहती है परंतु न्यूट्रॉनों की संख्या 1 से घट जाती है जिससे प्रोटॉनों की संख्या (अर्थात् आवेश-संख्या) 1 से बढ़ जाती है।

एक α तथा 2 β-emissions में [1999]

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α-कण को H2e4 के रूप में तथा β-कण को β0-1 के रूप में निरूपित किया जा सकता है। अतः, एक α-कण के उत्सर्जन के बाद परिणामी नाभिक की द्रव्यमान संख्या 4 इकाई तथा परमाणु संख्या 2 इकाई घट जाती है। इसी प्रकार, एक β-कण के उत्सर्जन के बाद परमाणु संख्या 1 इकाई बढ़ जाती है तथा उसकी द्रव्यमान संख्या समान रहती है। अतः, अभिक्रिया के अनुसार (प्रारंभिक नाभिक XAZ मानते हुए)। XAZYA-4Z-2+H2e4 (α-Particle) तथा YA-4Z-2XA-4Z+2(β0-1) (2 β-particles)

अतः, एक α तथा दो β-उत्सर्जन से परमाणु संख्या अपरिवर्तित रहती है अर्थात् समस्थानिकों का निर्माण होता है।

इस प्रक्रिया में मुक्त ऊर्जा ज्ञात कीजिए :

H21+H21H2e4+Q

दिया है :M H21= 2.01471 amu

  MH2e4= 4.00388 amu

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द्रव्यमान क्षति m=2×2.01471-4.00388=0.02554

मुक्त ऊर्जा = 0.02554×931.5 MeV=23.79 MeV

एक  यूरेनियम परमाणु के विखंडन से मुक्त ऊर्जा 200 MeV है। 3.2 W शक्ति उत्पन्न करने के लिए आवश्यक प्रति सेकंड विखंडनों की संख्या है (लीजिए, 1 eV = 1.6×10-19 J) [WB JEE 2010]

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हमारे पास है कि एक यूरेनियम परमाणु के विखंडन से मुक्त ऊर्जा 200 MeV है।

अतः, E=200×106×1.6×10-19

  = 3.2×10-11 J

आवश्यक शक्ति = 3.2 W

अतः आवश्यक विखंडनों की संख्या 3.23.2×10-11=1011 विखंडनों के बराबर है।

समीकरण XAZYAZ+1 + e0-1+ν¯ है  (UP CPMT 2002)

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समीकरण XAZYAZ+1 + e0-1+ν¯  β-उत्सर्जन निरूपित करता है (क्योंकि  β-किरण इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होता है)  

बोरॉन का परमाणु भार 10.81 है तथा उसके दो समस्थानिक B510 and B511 हैं। तो, प्रकृति में  B510 and B511 के परमाणुओं का अनुपात होगा 

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माना n1 तथा n2 B510 and B511 समस्थानिकों में परमाणुओं की संख्या हैं।

परमाणु भार 

=n1×(At. wt. of B510)+n2×(At. wt. of B511)n1+n2or 10.81=n1×10+n2×11n1+n2or 10.81 n1+10.81 n2=10 n1+ 11 n2or 0.81 n1=0.19 n2or n1n2=0.190.18=1981

ध्यान दें:- दो अथवा अधिक समस्थानिकों वाले किसी परमाणु का परमाणु भार दो अथवा अधिक समस्थानिकों के कुल भार का औसत होता है।

किसी रेडियोऐक्टिव पदार्थ में समय t1 पर सक्रियता R1 है तथा किसी बाद के समय t2 पर, वह R2 है। यदि पदार्थ का क्षय नियतांक λ है, तो

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(a) किसी रेडियोऐक्टिव पदार्थ की क्षय दर R प्रति सेकंड क्षयों की संख्या है।

रेडियोऐक्टिव क्षय नियम से,

  -dNdtN

अथवा    -dNdt=λN

अर्थात् अभिक्रिया की दर अभिकारकों की प्रारंभिक सांद्रता के अनुक्रमानुपाती है।

अतः,   R=-dNdt     or   RN

अथवा   R=λN   or R=λN0e-λt   ...(i)

जहाँ R0=λN0 समय t=0 पर रेडियोऐक्टिव पदार्थ की सक्रियता है।

समय t1,           R1=R0 e-λt1 पर   ...(ii)

समय t2,             R2=R0 e-λt2            पर   ...(iii)

समी. (ii) को समी. (iii) से भाग देने पर, हमारे पास है 

  R1R2=e-λt1e-λt2=e-λt1-t2

अथवा    R1=R2 e-λt1-t2

Z = 92 वाला कोई नाभिक क्रम में निम्नलिखित उत्सर्जित करता है:

α, β-, β-, α, α, α, α, α, β-,β-, α, β+, β+, α. परिणामी नाभिक का Z है [AIEEE 2003]

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ZResulting nucleus=92-8×2+4×1-2×1=78

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Frequently Asked Questions

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