भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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हाइड्रोजन के लिए सफल होने के बावजूद, बोर का मॉडल स्पेक्ट्रमी रेखाओं की सापेक्ष तीव्रताओं की व्याख्या करने में विफल रहा। यह क्या दर्शाता है?

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NCERT पाठ में उल्लेख है: 'यद्यपि बोर का मॉडल हाइड्रोजन-सदृश परमाणुओं द्वारा उत्सर्जित प्रकाश की आवृत्तियों का सही पूर्वानुमान करता है, यह स्पेक्ट्रम में आवृत्तियों की सापेक्ष तीव्रताओं की व्याख्या करने में असमर्थ है... प्रायोगिक प्रेक्षण दर्शाते हैं कि कुछ संक्रमण दूसरों की अपेक्षा अधिक अनुकूल होते हैं।' भिन्न-भिन्न तीव्रताएँ संक्रमण की भिन्न-भिन्न प्रायिकताओं को दर्शाती हैं।

बोर के मॉडल की सीमाओं को दूर करने के लिए क्वांटम यांत्रिकी का आगमन आवश्यक था, क्योंकि यह:

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NCERT पाठ के अनुसार: 'बोर मॉडल की इन अंतर्निहित कमज़ोरियों को देखते हुए इसे अन्य परमाणुओं तक बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं था। वास्तव में परमाणु की संरचना की ऐसी अंतर्दृष्टि की आवश्यकता थी जो द्रव्य के तरंग-कण द्वैतवाद की व्याख्या कर सके और हाइज़ेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत के अनुरूप हो। यह क्वांटम यांत्रिकी के आगमन के साथ आई।'

बोर के सिद्धांत में इलेक्ट्रॉन के तरंग स्वरूप की उपेक्षा का प्रत्यक्ष परिणाम निम्नलिखित में से कौन-सा है?

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NCERT पाठ के अनुसार: 'बोर के सिद्धांत में इलेक्ट्रॉन के तरंग स्वरूप की उपेक्षा की गई है। कक्षा एक स्पष्ट रूप से परिभाषित पथ है और यह पथ तभी पूर्णतः परिभाषित हो सकता है जब इलेक्ट्रॉन की सटीक स्थिति और सटीक वेग दोनों एक ही समय पर ज्ञात हों। हाइज़ेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार यह संभव नहीं है।' अतः तरंग स्वरूप की उपेक्षा, सुपरिभाषित कक्षा मानने के कारण, अनिश्चितता सिद्धांत से विरोध उत्पन्न करती है।

बोर के मॉडल में केवल एक क्वांटम संख्या ($n$) है। इसके विपरीत, क्वांटम यांत्रिकी एक क्वांटम अवस्था का वर्णन कितनी क्वांटम संख्याओं से करती है?

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NCERT पाठ के अनुसार: 'बोर के मॉडल में केवल एक क्वांटम संख्या n है। क्वांटम यांत्रिकी नामक नया सिद्धांत बोर की अभिधारणा का समर्थन करता है। परंतु (अधिक व्यापक रूप से स्वीकृत) क्वांटम यांत्रिकी में कोई दिया गया ऊर्जा स्तर केवल एक क्वांटम अवस्था के संगत नहीं हो सकता। उदाहरण के लिए, एक अवस्था चार क्वांटम संख्याओं (n, l, m और s) द्वारा अभिलक्षित होती है...'

क्वांटम यांत्रिक मॉडल जटिल परमाणुओं के लिए 'परमाणु संरचना का अधिक पूर्ण चित्र' मुख्यतः किसके समावेश के कारण प्रदान करता है?

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NCERT पाठ के अनुसार: 'जटिल परमाणुओं के लिए हमें क्वांटम यांत्रिकी पर आधारित एक नए और क्रांतिकारी सिद्धांत का उपयोग करना पड़ता है, जो परमाणु संरचना का अधिक पूर्ण चित्र प्रदान करता है।' पहले उल्लेख है कि क्वांटम यांत्रिकी 'द्रव्य के इस द्वैत व्यवहार को, विशेषकर उप-परमाणुक कणों के लिए, तथा अनिश्चितता सिद्धांत को ध्यान में रखती है।'

बोर का मॉडल हाइड्रोजन के रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या कर सका, परंतु बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के लिए असफल रहा। यह सीमा मॉडल की किसे संभालने में कमी की ओर संकेत करती है?

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NCERT पाठ के अनुसार: 'बोर मॉडल, हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम की व्याख्या के लिए संतोषजनक मॉडल देने के बावजूद, बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका।' बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं तक विस्तार न कर पाना जटिल इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन अन्योन्यक्रियाओं की व्याख्या में विफलता दर्शाता है, जो हाइड्रोजन जैसे एक-इलेक्ट्रॉन तंत्रों में अनुपस्थित हैं।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आदर्श गैस को सही ढंग से परिभाषित करता है?

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KINETIC_THEORY अध्याय के अनुसार, 'वह गैस जो समीकरण (12.3) [PV = $\mu$RT] को सभी दाबों और तापों पर यथार्थतः संतुष्ट करती है, आदर्श गैस के रूप में परिभाषित की जाती है।'

किन परिस्थितियों में वास्तविक गैसें आदर्श गैस के व्यवहार के निकट होती हैं?

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KINETIC_THEORY अध्याय कहता है, 'ध्यान दीजिए कि सभी वक्र निम्न दाब और उच्च ताप के लिए आदर्श गैस व्यवहार की ओर अग्रसर होते हैं।' ऐसा इसलिए है क्योंकि इन परिस्थितियों में अणु एक-दूसरे से दूर होते हैं और आणविक अन्योन्यक्रियाएँ नगण्य होती हैं।

बॉयल का नियम गैस के दाब और आयतन के बीच व्युत्क्रम संबंध का वर्णन करता है। आदर्श गैस की एक निश्चित मात्रा के लिए बॉयल का नियम किस स्थिति में लागू होता है?

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KINETIC_THEORY अध्याय में उल्लेख है, 'यदि हम $\mu$ और T को समीकरण (12.3) [PV = $\mu$RT] में नियत रखें, तो हमें PV = नियतांक प्राप्त होता है... अर्थात् ताप नियत रखने पर गैस के दिए गए द्रव्यमान का दाब आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यही प्रसिद्ध बॉयल का नियम है।'

चार्ल्स के नियम के अनुसार, नियत दाब पर गैस का आयतन निम्नलिखित में से किसके समानुपाती होता है?

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KINETIC_THEORY अध्याय कहता है, 'यदि आप P को नियत रखें, तो समीकरण (12.1) दर्शाता है कि V $\propto$ T, अर्थात् नियत दाब पर गैस का आयतन उसके परम ताप T के समानुपाती होता है (चार्ल्स का नियम)।'

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