RMS धारा (I) को शिखर धारा \((i_m)\) के संबंध में कैसे परिभाषित किया जाता है?
समीकरण 7.6 RMS धारा को परिभाषित करता है: '\(I = i_m / \sqrt{2} = 0.707 i_m\)'.
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RMS धारा (I) को शिखर धारा \((i_m)\) के संबंध में कैसे परिभाषित किया जाता है?
समीकरण 7.6 RMS धारा को परिभाषित करता है: '\(I = i_m / \sqrt{2} = 0.707 i_m\)'.
AC राशियों के लिए RMS मानों के उपयोग का क्या महत्व है?
NCERT कहता है, 'यह rms मानों की अवधारणा लाने का लाभ दर्शाता है। rms मानों के पदों में, शक्ति का समीकरण [समीकरण (7.7)] और ac परिपथों में धारा व वोल्टता के बीच संबंध मूलतः dc के समान ही हैं।'
एक चक्र में औसत धारा शून्य होने के बावजूद AC प्रतिरोधक में जूल तापन क्यों होता है?
NCERT कहता है, 'जूल तापन \(i^2R\) द्वारा दिया जाता है और \(i^2\) (जो सदैव धनात्मक है चाहे i धनात्मक हो या ऋणात्मक) पर निर्भर करता है, i पर नहीं। अतः जब ac धारा प्रतिरोधक से गुज़रती है तो जूल तापन और विद्युत ऊर्जा का क्षय होता है।'
शुद्ध प्रतिरोधी AC परिपथ में वोल्टता (V) और धारा (I) के 'फेज़र' क्या दर्शाते हैं?
NCERT कहता है, 'फेज़र V और I के परिमाण इन दोलनी राशियों के आयाम या शिखर मान \(v_m\) और \(i_m\) दर्शाते हैं।' फेज़र की दिशा कला दर्शाती है।
एक बल्ब 220 V आपूर्ति के लिए 100 W अंकित है। बल्ब का प्रतिरोध है:
दिया है \(P = 100 W\) और \(V_{rms} = 220 V\)। हम जानते हैं \(P = V_{rms}^2 / R\)। अतः, \(R = V_{rms}^2 / P = (220 V)^2 / 100 W = 48400 / 100 = 484 \Omega\)। यह सीधे उदाहरण 7.1 (a) से है।
एक बल्ब 220 V आपूर्ति के लिए 100 W अंकित है। बल्ब से प्रवाहित RMS धारा लगभग है:
दिया है \(P = 100 W\) और \(V_{rms} = 220 V\)। हम जानते हैं \(P = I_{rms} V_{rms}\)। अतः, \(I_{rms} = P / V_{rms} = 100 W / 220 V \approx 0.454 A\)। यह सीधे उदाहरण 7.1 (c) से है।
एक पूर्ण चक्र में \(\langle sin^2 \omega t \rangle \) का मान क्या है?
NCERT पाठ ने इसे व्युत्पन्न किया: 'त्रिकोणमितीय सर्वसमिका \(sin^2 \omega t = 1/2 (1– cos 2\omega t)\) का उपयोग करके, हमें मिलता है \(\langle sin^2 \omega t \rangle = (1/2) (1– \langle cos 2\omega t \rangle)\) और चूँकि \(\langle cos 2\omega t \rangle = 0\) होने से, हमें मिलता है, \(\langle sin^2 \omega t \rangle = 1/2\)' (समीकरण 7.5c)।
AC वोल्टता और धारा अदिश राशियाँ होते हुए भी सामान्यतः 'फेज़रों' द्वारा क्यों निरूपित की जाती हैं?
'विचारणीय बिंदु' खंड स्पष्ट करता है: 'यद्यपि फेज़र आरेख में वोल्टता और धारा को सदिशों द्वारा निरूपित किया जाता है, ये राशियाँ स्वयं वास्तव में सदिश नहीं हैं। ये अदिश राशियाँ हैं। ऐसा होता है कि आवर्ती रूप से बदलते अदिशों के आयाम और कलाएँ गणितीय रूप से उसी प्रकार संयोजित होती हैं जैसे घूर्णी सदिशों के प्रक्षेप... आवर्ती रूप से बदलती अदिश राशियों को निरूपित करने वाले 'घूर्णी सदिश' केवल इसलिए लाए गए हैं ताकि हमें इन राशियों को उस नियम से जोड़ने का सरल तरीका मिले जिसे हम पहले से सदिश योग के नियम के रूप में जानते हैं।'
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता ($s$) को सही ढंग से परिभाषित करता है?
NCERT पाठ के अनुसार, 'विशिष्ट ऊष्मा धारिता पदार्थ का वह गुण है जो यह निर्धारित करता है कि जब पदार्थ (बिना प्रावस्था परिवर्तन के) द्वारा ऊष्मा की दी गई मात्रा अवशोषित (या उत्सर्जित) की जाती है तो उसके ताप में कितना परिवर्तन होता है। इसे पदार्थ का ताप एक इकाई बदलने के लिए उसके द्वारा अवशोषित या उत्सर्जित प्रति इकाई द्रव्यमान ऊष्मा की मात्रा के रूप में परिभाषित किया जाता है।' गणितीय रूप से इसे $s = \frac{1}{m} \frac{\Delta Q}{\Delta T}$ व्यक्त किया जाता है।
मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता का SI मात्रक क्या है?
NCERT पाठ कहता है, 'मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता का SI मात्रक J mol$^{-1}$ K$^{-1}$ है'। J kg$^{-1}$ K$^{-1}$ विशिष्ट ऊष्मा धारिता (प्रति इकाई द्रव्यमान) का मात्रक है।
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