भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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निम्नलिखित में से कौन-सा असंरक्षी बल का लक्षण है?

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Explanation

NCERT पाठ संरक्षी बलों के लिए इंगित करता है, 'बंद पथ में इस बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।' इसके विपरीत, घर्षण जैसे असंरक्षी बलों के लिए, 'बंद पथ पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य शून्य नहीं होता और घर्षण से कोई स्थितिज ऊर्जा संबद्ध नहीं की जा सकती।' यह सीधे दर्शाता है कि बंद पथ पर असंरक्षी बल द्वारा किया गया कार्य सामान्यतः अशून्य होता है।

वायु में दोलन करते एक लोलक पर विचार कीजिए। लोलक पर वायु का प्रतिरोधी बल एक असंरक्षी बल है। इस बल का लोलक की गति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

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NCERT अभ्यास 'कंपन करते लोलक को विराम में लाने में वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किए गए कार्य' के विषय में पूछता है, जिसका तात्पर्य है कि यह ऋणात्मक कार्य करता है और ऊर्जा क्षय होता है। पाठ स्पष्ट रूप से कहता है 'गतिशील पिंड पर घर्षण या श्यान बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।' जब वायु प्रतिरोध जैसा असंरक्षी बल ऋणात्मक कार्य करता है, तो यह निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा में कमी करता है, जिससे अवमंदन होता है और अंततः लोलक विराम में आ जाता है।

कार्य-ऊर्जा प्रमेय में, यदि संरक्षी और असंरक्षी दोनों बल कार्य कर रहे हों, तो पिंड की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन ($\Delta K$) बराबर होता है:

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कार्य-ऊर्जा प्रमेय का सामान्य रूप $\Delta K = W_{net}$ कहता है। NCERT पाठ विस्तार से बताता है: 'WE प्रमेय से ($F_c + F_{nc}) \Delta x = \Delta K$।' यहाँ ($F_c + F_{nc}$) नेट बल को निरूपित करता है, अतः $\Delta K$ सभी बलों (संरक्षी और असंरक्षी) द्वारा किए गए कुल कार्य के बराबर है।

निम्नलिखित में से कौन-सा असंरक्षी बल द्वारा किए गए ऋणात्मक कार्य का उदाहरण है?

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NCERT अभ्यास विभिन्न बलों द्वारा किए गए कार्य का चिह्न बताने को कहते हैं। एक विकल्प है 'आनत तल पर नीचे फिसलते पिंड पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य'। ऐसी स्थिति में घर्षण गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है, अतः ऋणात्मक कार्य करता है। पाठ सामान्य रूप से यह भी कहता है 'गतिशील पिंड पर घर्षण या श्यान बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।' गुरुत्व, स्प्रिंग बल और स्थिरवैद्युत बल संरक्षी बल हैं और धनात्मक या ऋणात्मक कार्य कर सकते हैं, परंतु घर्षण स्पष्ट रूप से असंरक्षी है और गति के दौरान उसका कार्य प्रायः ऋणात्मक होता है।

यदि किसी निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा (K + V) संरक्षित नहीं है, तो इसका तात्पर्य है कि उपस्थित हैं:

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NCERT पाठ कहता है: 'किसी निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है यदि उस पर कार्य करने वाले बल संरक्षी हों।' इसके विपरीत, यदि यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित नहीं है, तो इसका तात्पर्य है कि असंरक्षी बल निकाय पर कार्य कर रहे हैं। समीकरण $\Delta E = W_{nc}$ सीधे दर्शाता है कि कुल यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तन ($\Delta E$) असंरक्षी बलों द्वारा किए गए कार्य ($W_{nc}$) के कारण है। यद्यपि संरक्षी बल अब भी उपस्थित हो सकते हैं, असंरक्षी बल ही यांत्रिक ऊर्जा के असंरक्षण का कारण हैं।

एक पिंड खुरदुरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गति कर रहा है। लगाए गए बल और घर्षण बल द्वारा किए गए कार्य के विषय में क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

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एकसमान वेग के लिए पिंड पर नेट बल शून्य होता है। इसका अर्थ है कि लगाया गया बल परिमाण में घर्षण बल के बराबर और दिशा में विपरीत होना चाहिए। लगाया गया बल गति की दिशा में कार्य करता है और धनात्मक कार्य करता है। घर्षण बल गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है और ऋणात्मक कार्य करता है। चूँकि पिंड एकसमान वेग से गति करता है, लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य परिमाण में घर्षण द्वारा किए गए ऋणात्मक कार्य के बराबर होना चाहिए, ताकि नेट कार्य शून्य हो और इस प्रकार गतिज ऊर्जा में परिवर्तन शून्य हो (क्योंकि वेग नियत है)। NCERT अभ्यास 'खुरदुरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिशील पिंड पर लगाए गए बल द्वारा किए गए कार्य' और 'आनत तल पर नीचे फिसलते पिंड पर घर्षण द्वारा किए गए कार्य' (जिसका तात्पर्य घर्षण के लिए ऋणात्मक कार्य है) का उल्लेख करता है। अतः लगाया गया बल धनात्मक कार्य करता है, और घर्षण समान परिमाण का ऋणात्मक कार्य करता है।

निम्नलिखित में से कौन-सी भौतिक राशि सदैव धनात्मक होती है?

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NCERT पाठ के अनुसार, 'किया गया कार्य एक अदिश राशि है। यह द्रव्यमान और गतिज ऊर्जा के विपरीत, जो धनात्मक अदिश राशियाँ हैं, धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है।' स्थितिज ऊर्जा एक नियतांक तक अनिर्धारित है और संदर्भ बिंदु के चयन के अनुसार धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकती है। विस्थापन एक सदिश राशि है और इसका घटक धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है।

निम्नलिखित में से कौन-सा अभियांत्रिकी अनुप्रयोग पदार्थों के प्रत्यास्थ व्यवहार पर अत्यधिक निर्भर करता है?

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दिए गए पाठ में कहा गया है, 'पदार्थों का प्रत्यास्थ व्यवहार अभियांत्रिकी अभिकल्पना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए... क्या हम ऐसा वायुयान बना सकते हैं जो बहुत हल्का हो लेकिन पर्याप्त मजबूत हो?' यह पदार्थों के प्रत्यास्थ व्यवहार को हवाई जहाज के पंख जैसी हल्की परंतु मजबूत संरचनाओं की अभिकल्पना से सीधे जोड़ता है।

निर्माण में रेल की पटरियों और स्टील गर्डरों के लिए I-आकृति सामान्यतः क्यों प्रयोग की जाती है?

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पाठ प्रश्न उठाता है: 'रेल की पटरी की आकृति I जैसी विशेष क्यों होती है?' यद्यपि सीधा उत्तर नहीं दिया गया है, परोक्ष रूप से यह आकृति बलों को दक्षता से सहने के लिए प्रत्यास्थ व्यवहार के विचारों के कारण चुनी जाती है। I-बीम उच्च सामर्थ्य-भार अनुपात के लिए अभिकल्पित होते हैं, जो बंकन और बकलिंग का प्रभावी प्रतिरोध करते हैं — यह संरचनात्मक अभिकल्पना में प्रत्यास्थ व्यवहार का एक प्रमुख अनुप्रयोग है।

दिए गए पाठ के अनुसार, किसी पदार्थ की कौन-सी विशेषता उसे अत्यधिक प्रत्यास्थ माने जाने को सुनिश्चित करती है?

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'POINTS TO PONDER' खंड स्पष्ट करता है: 'दैनिक जीवन में हमें लगता है कि जो पदार्थ अधिक खिंचता है वह अधिक प्रत्यास्थ है, लेकिन यह एक भ्रांति है। वास्तव में, जो पदार्थ दिए गए भार के लिए कम खिंचता है, उसे अधिक प्रत्यास्थ माना जाता है।' यह सामान्य अंतर्ज्ञान के विपरीत है और प्रत्यास्थता की वैज्ञानिक परिभाषा को उजागर करता है।

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Frequently Asked Questions

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