किरचॉफ के नियमों को 'विद्युत परिपथों के विश्लेषण के लिए बहुत उपयोगी' माना जाता है, क्योंकि:
संदर्भ कहता है: 'प्रतिरोधकों के श्रेणी और समांतर संयोजनों के लिए पहले व्युत्पन्न सूत्र परिपथ में सभी धाराओं और विभवांतरों को निर्धारित करने के लिए सदैव पर्याप्त नहीं होते। किरचॉफ के नियम कहलाने वाले दो नियम विद्युत परिपथों के विश्लेषण के लिए बहुत उपयोगी हैं।'