भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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प्रेरकत्व L वाले प्रेरक में धारा I स्थापित करने में किए गए कुल कार्य की मात्रा किसके द्वारा दी जाती है:

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NCERT पाठ व्युत्पत्ति और अंतिम सूत्र दर्शाता है: 'धारा I स्थापित करने में किए गए कार्य की कुल मात्रा $W = \int dW = \int_0^I L I' dI' = \frac{1}{2} L I^2$ है।' (समीकरण 6.17)।

निम्नलिखित में से कौन-सा प्रति इकाई आयतन संचित चुंबकीय ऊर्जा के व्यंजक, $u_B = \frac{B^2}{2\mu_0}$, के तुल्य है?

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उदाहरण 6.9 (a) और (b) से, कुल चुंबकीय ऊर्जा $U_B = \frac{1}{2} L I^2$ है। प्रति इकाई आयतन चुंबकीय ऊर्जा $u_B = \frac{U_B}{V} = \frac{U_B}{Al}$ है (जहाँ V परिनालिका का आयतन है, $Al$)। अतः, $u_B = \frac{1}{2} L I^2 / (Al)$। यह $u_B$ से $\frac{B^2}{2\mu_0}$ तक पहुँचने की व्युत्पत्ति में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।

संदर्भ के अनुसार, प्रेरक के ऊर्जा संचयन में 'L' मुख्यतः क्या निरूपित करता है?

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NCERT पाठ इसे स्पष्ट रूप से समझाता है: 'L, m के सदृश है (अर्थात L विद्युत जड़त्व है और परिपथ में धारा की वृद्धि और क्षय का विरोध करता है)।' यह विद्युत जड़त्व के मापक के रूप में L की भूमिका को रेखांकित करता है।

लंबी परिनालिका के लिए, प्रति इकाई आयतन संचित चुंबकीय ऊर्जा ($u_B$) निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करती है?

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व्युत्पन्न सूत्र $u_B = \frac{B^2}{2\mu_0}$ है। इसका अर्थ है कि प्रति इकाई आयतन चुंबकीय ऊर्जा केवल चुंबकीय क्षेत्र B और मुक्त आकाश की पारगम्यता $\mu_0$ पर निर्भर करती है (निर्वात क्रोड या वायु क्रोड परिनालिका मानते हुए)। यद्यपि B स्वयं धारा और परिनालिका के गुणों पर निर्भर करता है, प्रश्न पूछता है कि दिए गए सूत्र से $u_B$ सीधे किस पर निर्भर करती है।

प्रेरक में संचित ऊर्जा के लिए व्यंजक $W = \frac{1}{2} L I^2$ किस शर्त के अंतर्गत वैध है?

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NCERT पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'यदि हम प्रतिरोधी हानियों की उपेक्षा करें और केवल प्रेरणिक प्रभाव पर विचार करें, तो समीकरण (6.14) का उपयोग करके, $\frac{dW}{dt} = I L \frac{dI}{dt}$।' W ज्ञात करने के लिए आगे का समाकलन $W = \frac{1}{2} L I^2$ देता है। अतः यह व्यंजक नगण्य प्रतिरोधी हानियाँ मानता है।

किरचॉफ का प्रथम नियम, जिसे संधि नियम भी कहते हैं, किस भौतिक राशि के संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है?

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संदर्भ कहता है: 'किरचॉफ का संधि नियम आवेश के संरक्षण पर आधारित है और किसी संधि पर बाहर जाने वाली धाराओं का योग आने वाली धारा के बराबर होता है।' यह संधि नियम को सीधे आवेश संरक्षण से जोड़ता है।

किरचॉफ के लूप नियम के अनुसार, किसी विद्युत परिपथ में किसी भी बंद लूप के चारों ओर विभव में परिवर्तनों का बीजगणितीय योग क्या होता है?

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संदर्भ कहता है: 'लूप नियम: प्रतिरोधकों और सेलों वाले किसी भी बंद लूप के चारों ओर विभव में परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है (चित्र 3.15)।' यह लूप नियम का सीधा कथन है।

किरचॉफ के नियम लागू करते समय, जब किसी धारा 'I' को आरंभ में एक दिष्ट तीर से अंकित किया जाता है, और गणना के बाद 'I' ऋणात्मक निकलती है, तो इसका क्या अर्थ है?

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संदर्भ कहता है: 'यदि अंततः I धनात्मक निकले, तो प्रतिरोधक में वास्तविक धारा तीर की दिशा में है। यदि I ऋणात्मक निकले, तो धारा वास्तव में तीर के विपरीत दिशा में बहती है।'

विद्युत वाहक बल (emf) $e$ और आंतरिक प्रतिरोध $r$ वाले किसी सेल के लिए, यदि धारा $I$ सेल के भीतर ऋणात्मक टर्मिनल (N) से धनात्मक टर्मिनल (P) की ओर बहती है, तो विभवांतर $V = V(P) - V(N)$ क्या है?

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संदर्भ उल्लेख करता है: '$V = V(P) – V(N) = e – I r$ [समीकरण (3.38), धनात्मक टर्मिनल P और ऋणात्मक टर्मिनल N के बीच; यहाँ I सेल के भीतर N से P की ओर बहने वाली धारा है]।'

किरचॉफ का संधि नियम लागू करते समय, यह कथन कि 'किसी संधि पर या किसी लाइन के किसी बिंदु पर आवेशों का संचय नहीं होता' मुख्यतः नियम के किस पहलू को न्यायसंगत ठहराता है?

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संदर्भ समझाता है: 'इस नियम का प्रमाण इस तथ्य से मिलता है कि जब धाराएँ स्थायी होती हैं, तो किसी संधि पर या किसी लाइन के किसी बिंदु पर आवेशों का संचय नहीं होता। अतः अंदर बहने वाली कुल धारा (जो संधि में आवेश के प्रवाह की दर है) बाहर बहने वाली कुल धारा के बराबर होनी चाहिए।'

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Frequently Asked Questions

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