Dual Nature of Matter and Radiation NEET प्रश्न हिंदी में — भौतिक विज्ञान (Physics) MCQ उत्तर सहित

Dual Nature of Matter and Radiation (Physics) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

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भाषा English हिंदी
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द्रव्यमान 1 mg के किसी कण की तरंगदैर्ध्य 3×106 ms-1 के वेग से गतिमान किसी इलेक्ट्रॉन के समान है। कण का वेग है 

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किसी कण की तरंगदैर्ध्य इस प्रकार दी जाती है 

  λ=hp

जहाँ h प्लांक नियतांक है तथा किसी इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य इस प्रकार दी जाती है 

  λe=hpe

परंतु  λ=λe

अतः,  p=pe

अथवा  mv=meve

अथवा  v=mevem

नीचे दिए गए आँकड़े रखने पर 

me=9.1×10-31 kg , ve=3×106 m/s;m=1 mg =1 ×10-6 kg v=9.1×10-31×3×1061×10-6=2.7×10-18  ms-1

जब किसी इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा बढ़ाई जाती है, तो संबद्ध तरंग की तरंगदैर्ध्य

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(b) λ=hp=h2mE;        λ1E   ( h तथा m = नियतांक)

विकिरण की द्वैत प्रकृति किसके द्वारा दर्शाई जाती है:

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(d) Photoelectric effectParticle natureDiffractionWave natureDual nature

द्रव्यमान m का कोई इलेक्ट्रॉन जब विभवांतर V द्वारा त्वरित किया जाता है तो उसकी डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य λ होती है। उसी विभवांतर द्वारा त्वरित द्रव्यमान M के किसी प्रोटॉन से संबद्ध डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य होगी

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(b) λ=h2mEλ1m  ( E = समान)

आवृत्ति v का प्रकाश देहली आवृत्ति v0v0<v वाले किसी पदार्थ पर आपतित होता है। उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा होगी 

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(a) कार्य फलन, W=hv0

आपतित प्रकाश की ऊर्जा = hv

उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा = E-hv0

  =h(v-v0)

दो सर्वसम प्रकाश-कैथोड आवृत्तियों f1 तथा f2 का प्रकाश प्राप्त करते हैं। यदि बाहर निकलने वाले प्रकाश इलेक्ट्रॉनों (द्रव्यमान m के) के वेग क्रमशः v1 तथा v2 हैं, तो 

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(b) आइंस्टीन के प्रकाशविद्युत समीकरण का उपयोग करने पर

E=W0+Kmax

hf1=W0+12mv12       ...(i)hf2=W0+12mv22        ...(ii)hf1-f2=12mv12-v22v12-v22=2hmf1-f2

उत्तेजक तरंगदैर्ध्य λ वाले किसी प्रकाशउत्सर्जी सेल में, तीव्रतम इलेक्ट्रॉन की चाल v है। यदि उत्तेजक तरंगदैर्ध्य बदलकर 3λ/4 कर दी जाए, तो उत्सर्जित तीव्रतम इलेक्ट्रॉन की चाल होगी 

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(d) 

hv-W0=12mvmax2hcλ-hcλ0=12mvmax2hcλ0-λλλ0=12mvmax2vmax=2hcmλ0-λλλ0 

जब तरंगदैर्ध्य λ है तथा वेग v है, तब 

v=2hcmλ0-λλ0λ  .....(i) 

जब तरंगदैर्ध्य 3λ4 है तथा वेग v' है, तब 

v'=2hcmλ0-3λ/4λ0×3λ/4  .....(ii) 

समीकरण (ii) को (i) से भाग देने पर, हमें प्राप्त होता है

v'v=λ0-3λ/434λλ0×λλ0λ0-λv'=v431/2λ0-3λ/4λ0-λ    i.e. v'>v431/2

आपतित प्रकाश किरणों की आवृत्तियों v1 तथा v2 v1>v2 के लिए किसी धात्विक पृष्ठ से प्रकाशविद्युत उत्सर्जन प्रेक्षित होता है। यदि दोनों स्थितियों में उत्सर्जित प्रकाशइलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा के अधिकतम मान 1:k के अनुपात में हैं, तो धात्विक पृष्ठ की देहली आवृत्ति है

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(b) hv-hv0=Kmax का उपयोग करने पर

hv1-v0=K1  .....(i) 

तथा hv2-v0=K2  .....(ii)

v1-v0v2-v0=K1K2=1K, Hence v0=Kv1-v2K-1

हाइड्रोजन तथा हीलियम के अणुओं, जो क्रमशः तापमान 27 °C तथा 127 °C पर हैं, की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्यों का अनुपात है

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(c) डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य λ=hmvrms, दिए गए तापमान (T) पर किसी गैस कण का वर्ग माध्य मूल वेग इस प्रकार दिया जाता है

12mvrms2=32kTvrms=3kTmmvrms=3mkT λ=hmvrms=h3mkTλHλHe=mHeTHemHTH=4273+1272273+27=83

अभिकथन : धनात्मक किरणों के लिए विशिष्ट आवेश एक अभिलाक्षणिक नियतांक है।
कारण : विशिष्ट आवेश धनात्मक किरणों में उपस्थित धनायनों के आवेश तथा द्रव्यमान पर निर्भर करता है।

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(b) एक गैस के संगत किसी धनायन का विशिष्ट आवेश नियत होता है परंतु वह भिन्न गैसों के लिए भिन्न होता है।

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Frequently Asked Questions

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