Dual Nature of Matter and Radiation NEET प्रश्न हिंदी में — भौतिक विज्ञान (Physics) MCQ उत्तर सहित

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अभिकथन : पोटैशियम तथा सीज़ियम प्रकाश-विद्युत सेलों में इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोगी हैं।

कारण : पोटैशियम तथा सीज़ियम पर प्रकाश डालने पर, अवशोषित प्रकाश ऊर्जा परमाणु से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त होती है।

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(A)। पोटैशियम तथा सीज़ियम की आयनन ऊर्जाएँ कम होती हैं।

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निम्नलिखित में से कौन-सी परिघटना मानव नेत्र की रेटिना में शलाकाओं और शंकुओं द्वारा प्रकाश के अवशोषण का सबसे अच्छा वर्णन करती है?

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दिए गए पाठ के अनुसार, 'नेत्र-लेंस द्वारा प्रकाश को एकत्रित और फोकस करने की क्रियाविधि का वर्णन तरंग चित्रण में भली-भाँति होता है। परंतु (रेटिना की) शलाकाओं और शंकुओं द्वारा इसके अवशोषण के लिए प्रकाश के फोटॉन चित्रण की आवश्यकता होती है।' यह सीधे दर्शाता है कि शलाकाओं और शंकुओं द्वारा अवशोषण में प्रकाश की कण प्रकृति, अर्थात् फोटॉन, शामिल है।

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दे ब्रॉग्ली परिकल्पना सुझाती है कि यदि विकिरण द्वैत (तरंग-कण) प्रकृति प्रदर्शित करता है, तो पदार्थ के कणों को भी तरंग-सदृश गुण प्रदर्शित करना चाहिए। यह परिकल्पना इस तर्क पर आधारित थी कि:

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पाठ कहता है, 'उन्होंने तर्क दिया कि प्रकृति सममित है और दो मूलभूत भौतिक सत्ताओं – पदार्थ और ऊर्जा – का सममित स्वरूप होना चाहिए। यदि विकिरण द्वैत पहलू दिखाता है, तो पदार्थ को भी दिखाना चाहिए।' यही दे ब्रॉग्ली की परिकल्पना के पीछे का मूल तर्क है।

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किसी गतिशील कण से संबद्ध दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) और उसके संवेग (p) के बीच क्या संबंध है?

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दे ब्रॉग्ली संबंध $\lambda = h/p$ के रूप में दिया गया है, जहाँ h प्लांक नियतांक है और p कण का संवेग है। (पाठ में समीकरण 11.5: $\lambda = h/p = h/mv$)।

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विद्युत चुंबकीय विकिरण के कण या फोटॉन विवरण की स्वीकृति आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण की सटीक पुष्टि से उल्लेखनीय रूप से प्रभावित हुई, जो किसके द्वारा की गई:

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पाठ उल्लेख करता है, 'मिलिकन के पहले सटीक मापनों ने आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण की पुष्टि की और प्लांक नियतांक h का सटीक मान प्राप्त किया। इससे आइंस्टीन द्वारा प्रस्तुत विद्युत चुंबकीय विकिरण के कण या फोटॉन विवरण (प्रकृति) को स्वीकृति मिली।'

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द्रव्य तरंग का निम्नलिखित में से कौन-सा लक्षण द्रव्य कण के आवेश और प्रकृति से स्वतंत्र है?

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पाठ कहता है, 'दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) द्रव्य कण के आवेश और प्रकृति से स्वतंत्र है।'

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निम्नलिखित में से किन कणों के लिए दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य उल्लेखनीय रूप से मापने योग्य है, जो प्रायः क्रिस्टलों में परमाणु-तलों के अंतराल की कोटि की होती है?

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पाठ दर्शाता है, 'यह केवल इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि जैसे उप-परमाणुक कणों के मामले में ही उल्लेखनीय रूप से मापने योग्य (क्रिस्टलों में परमाणु-तलों के अंतराल की कोटि की) है (उनके द्रव्यमानों और इसलिए संवेगों की लघुता के कारण)।'

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बोर मॉडल की कमियों को दूर करते हुए परमाणु के क्वांटम यांत्रिक मॉडल के प्रतिपादन में योगदान देने वाले दो महत्वपूर्ण विकास थे:

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खंड '2.5 t oWarDs QUantUm mecHanical moDel of tHe atom' कहता है: 'ऐसे मॉडल के प्रतिपादन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दो महत्वपूर्ण विकास थे: 1. पदार्थ का द्वैत व्यवहार, 2. हाइज़ेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत।'

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'द्रव्यमान ऊर्जा का एक अन्य रूप है' की अवधारणा और प्रसिद्ध द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता संबंध ($E = mc^2$) किसके द्वारा प्रस्तावित किया गया:

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'13.4.1 द्रव्यमान – ऊर्जा' के अंतर्गत पाठ स्पष्ट रूप से कहता है, 'आइंस्टीन ने अपने विशिष्ट आपेक्षिकता सिद्धांत से दर्शाया कि द्रव्यमान को ऊर्जा के एक अन्य रूप के रूप में मानना आवश्यक है... आइंस्टीन ने प्रसिद्ध द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता संबंध $E = mc^2$ (13.6) दिया।'

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प्रकाश-विद्युत प्रभाव के अतिरिक्त किस प्रमाण ने प्रकाश के कण-सदृश व्यवहार को सुदृढ़ किया?

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पाठ कहता है, 'प्रकाश के कण-सदृश व्यवहार की आगे पुष्टि 1924 में ए.एच. कॉम्पटन (1892-1962) के इलेक्ट्रॉनों से X-किरणों के प्रकीर्णन के प्रयोग द्वारा हुई।'

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Frequently Asked Questions

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