Electromagnetic Induction NEET प्रश्न हिंदी में — भौतिक विज्ञान (Physics) MCQ उत्तर सहित

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एक चालकीय वृत्ताकार लूप को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B = 0.025 T में रखा गया है, जिसका तल लूप के लंबवत है। लूप की त्रिज्या 1 ms-1 की स्थिर दर से सिकुड़ रही है। जब त्रिज्या 2 cm है, तब प्रेरित emf है:

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Explanation

चुंबकीय फ्लक्स के सूत्र के अनुसार 
चुंबकीय फ्लक्स ϕ=B.A और A=πr2 
इसे B. πr2 के रूप में भी लिखा जा सकता है। 
इसलिए प्रेरित emf को चुंबकीय फ्लक्स के संबंध का उपयोग करके निम्नानुसार ज्ञात किया जा सकता है- 
e=dϕdt=B2πrdrdt 
अब हम दिए गए मान को समीकरण में रखते हैं 
= 0.025 x πx 2 x 2 10-2 x 1 x 10-3 = πμV

800 फेरों वाली कुंडली का प्रभावी क्षेत्रफल 0.05 m2 है और इसे 5×10-5 T के चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा जाता है। जब कुंडली के तल को 0.1 सेकंड में इसके किसी भी समतलीय अक्ष के चारों ओर 90° घुमाया जाता है, तो कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल होगा:

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दो कुण्डलियाँ जिनके स्व-प्रेरकत्व क्रमशः 2 mH और 8 mH हैं, एक-दूसरे के इतने निकट रखी जाती हैं कि एक कुण्डली में प्रभावी फ्लक्स पूरी तरह से दूसरी कुण्डली से जुड़ जाता है। इन कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरकत्व है:

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दिया गया है, 
कुण्डली 1 का स्व-प्रेरकत्व = 2 mH 
कुण्डली 2 का स्व-प्रेरकत्व = 8 mH 
जब एक कुण्डली से संबद्ध कुल फ्लक्स दूसरी कुण्डली से जुड़ता है, अर्थात् अधिकतम फ्लक्स संयोजन की स्थिति, तब 
M12 =N2ϕB2i1 और M21 =N1ϕB1i2 
इसी प्रकार, L1 =N1ϕB1i1 और L2=N2ϕB2i2 
यदि कुण्डली 2 का सारा फ्लक्स कुण्डली 1 से जुड़ता है और इसके विपरीत भी, तब 
ϕB2 = ϕB1
चूँकि, M12 = M21 = M, इसलिए हमारे पास है 
M12M21=M2 =N1N2ϕB1ϕB2i1i2 = L1L2 
∴ Mmax =L1L2 
दिया गया है, L1 = 2 mH, L2 = 8 mH 
∴ Mmax = 2×8=16= 4 mH

एकसमान चुंबकीय प्रेरण B = 10–2 tesla के क्षेत्र में, 30 cm त्रिज्या और π2 ohm प्रतिरोध वाली एक वृत्ताकार कुंडली को एक अक्ष के परितः घुमाया जाता है जो B की दिशा के लंबवत है तथा कुंडली का व्यास बनाता है। यदि कुंडली 200 rpm पर घूमती है, तो कुंडली में प्रेरित प्रत्यावर्ती धारा का आयाम है :

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प्रत्यावर्ती धारा का आयाम ac=i0=V0R=ωNBAR=(2πν)NB(πr2)R

i0=2π×20060×1×102×π×(0.3)2π2=6mA

जब कोई रेलगाड़ी 1 मीटर की दूरी पर स्थित पटरियों के अनुदिश $360 km h^{-1} $ चाल से चलती है। पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक $ 0.1 \times 10^{-4} T $ है। पटरियों के बीच प्रेरित वि.वा.बल का मान क्या है ?

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किसी dc मोटर के आर्मेचर का प्रतिरोध $ 20 \Omega $ है। 220 V dc सप्लाई से चलाने पर वह 1.5 A धारा लेता है। उसमें प्रेरित पश्च वि.वा.बल का मान होगा

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किसी DC मोटर में पश्च EMF (विद्युत वाहक बल) की गणना ओम के नियम तथा पश्च EMF के सूत्र से की जा सकती है। आर्मेचर प्रतिरोध पर वोल्टता पात $V_R = I imes R$ द्वारा दिया जाता है, जहाँ $I$ धारा है तथा $R$ प्रतिरोध है। आर्मेचर प्रतिरोध 20 Ω तथा धारा 1.5 A दी होने पर, वोल्टता पात $V_R = 1.5 imes 20 = 30V$ है। पश्च EMF $E_b$ इस वोल्टता पात को सप्लाई वोल्टता से घटाकर प्राप्त किया जा सकता है: $E_b = V_{supply} - V_R = 220V - 30V = 190V$।

2m लंबाई का एक तार अपनी लंबाई को 0.5 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखते हुए $2ms^{-1}$ चाल से गति कर रहा है। इस तार से जुड़े परिपथ का प्रतिरोध $6 \Omega $ है। तार को नियत चाल से गतिमान रखने के लिए किए जा रहे कार्य की दर है ..........

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$ \rho = F.v. = {B^2 l^2 v^2 \over R } = {1 \over 6 } W $

एक प्रेरक-प्रतिरोध-बैटरी परिपथ t = 0 पर चालू किया जाता है। यदि बैटरी का वि.वा.बल $ \varepsilon $ है, तो एक समय नियतांक $ \tau $ में बैटरी से प्रवाहित आवेश ज्ञात कीजिए

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$ I = I_0 (1 - e^{-t /T}) (I_0 =I_{max}) $ $ Q = \int _0 ^ T (I_0 -I_0e ^{-t /T })dt = I_0 T/e $

8.4 mH प्रेरकत्व तथा $ 6 \Omega $ प्रतिरोध वाली एक कुंडली 12 V की बैटरी से जोड़ी गई है। कुंडली में धारा 1A हो जाती है समय..........

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$ I_0 = 12/6 = 2A . $ धारा आधी हो जाती है समय t = 0.693 L/R = 1ms में

त्रिज्या R की कोई चालक चकती अपनी अक्ष के परितः कोणीय वेग ω से घूम रही है। तो चकती के केंद्र तथा उसके किनारे के बीच विभवांतर है (कोई चुंबकीय क्षेत्र उपस्थित नहीं है)

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जब त्रिज्या R की कोई चालक चकती अपनी अक्ष के परितः कोणीय वेग ω से घूमती है, तो चकती में इलेक्ट्रॉन अपकेंद्री बल अनुभव करते हैं। इससे केंद्र तथा किनारे के बीच विभवांतर उत्पन्न होता है जो (meω^2R^2)/(2e) द्वारा दिया जाता है, जहाँ me इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है तथा e इलेक्ट्रॉन का आवेश है। यह अपकेंद्री बल के विरुद्ध इलेक्ट्रॉनों को गति कराने में किए गए कार्य के कारण है।

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Frequently Asked Questions

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