एक छोटा चुंबक कुंडली के अक्ष पर है और कुंडली से इसकी दूरी 80 सेमी है। इस स्थिति में कुंडली से संबद्ध फ्लक्स वेबर-टर्न है। यदि कुंडली को 0.08 सेकंड में चुंबक की ओर 40 सेमी विस्थापित किया जाता है, तो कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल होगा -
Electromagnetic Induction NEET प्रश्न हिंदी में — भौतिक विज्ञान (Physics) MCQ उत्तर सहित
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एक 50 फेरों वाली वृत्ताकार कुंडली की त्रिज्या 3 सेमी है, इसे कुंडली के क्षेत्रफल के अभिलंबवत कार्य करने वाले चुंबकीय क्षेत्र में रखा गया है। चुंबकीय क्षेत्र B को 2 मिलीसेकंड में 0.10 टेस्ला से बढ़ाकर 0.35 टेस्ला कर दिया जाता है। कुंडली में औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल है-
400 फेरों वाली एक कसकर लपेटी गई कुंडली का प्रेरकत्व 8 mH है। इसमें 5 mA की धारा प्रवाहित की जाती है। कुंडली के माध्यम से चुंबकीय फ्लक्स लगभग है
100 फेरों वाली कुंडली के प्रत्येक फेरे से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स है, जहाँ t सेकंड में है। t = 2 s पर प्रेरित विद्युत वाहक बल है
L – R परिपथ में धारा, अपने स्थिर अवस्था मान के तक 4 सेकंड में बढ़ती है। इस परिपथ का समय स्थिरांक है
R त्रिज्या का एक अतिचालक लूप में स्व-प्रेरकत्व L है। एक समान और स्थिर चुंबकीय क्षेत्र B लूप के तल के लंबवत लगाया जाता है। प्रारंभ में इस लूप में धारा शून्य है। लूप को 180° घुमाया जाता है। घुमाने के बाद लूप में धारा बराबर है –
3. अतिचालक लूप में फ्लक्स नहीं बदल सकता।
प्रारंभ में धारा शून्य थी, इसलिए स्व-फ्लक्स शून्य था।
अंत में
1 सेमी त्रिज्या और 100 फेरों वाली एक कुंडली को 5 सेमी त्रिज्या और 8 फेरे/सेमी वाली एक लंबी परिनालिका के मध्य में रखा गया है। मिलीहेनरी में अन्योन्य प्रेरण होगा-
1. परिनालिका में चुंबकीय प्रेरण
कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स
15 वोल्ट का एक विद्युत वाहक बल 5 हेनरी प्रेरकत्व और 10 ओम प्रतिरोध वाले परिपथ में लगाया जाता है। समय t = और t = 1 सेकंड पर धाराओं का अनुपात है -
एक निश्चित प्रेरक में संग्रहीत चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा 25 mJ है, जब प्रेरक में धारा 60 mA है। इस प्रेरक का प्रेरकत्व है :
7 cm2 क्षेत्रफल और 50 फेरों वाली एक कुंडली को इसके तल के साथ चुंबकीय क्षेत्र B के लंबवत रखा गया है। बिना प्रतिरोध वाली कुंडली से 30 ohm का प्रतिरोध जुड़ा हुआ है। B, 75 exp (– 200t) gauss है। t = 5 ms पर प्रतिरोध से गुजरने वाली धारा होगी -
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