n फेरों तथा प्रतिरोध RΩ वाली कोई कुंडली प्रतिरोध 4RΩ के किसी धारामापी से जोड़ी जाती है। यह संयोजन t सेकंड के समय में चुंबकीय क्षेत्र W1 से W2 तक गति कराया जाता है। परिपथ में प्रेरित धारा है
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n फेरों तथा प्रतिरोध RΩ वाली कोई कुंडली प्रतिरोध 4RΩ के किसी धारामापी से जोड़ी जाती है। यह संयोजन t सेकंड के समय में चुंबकीय क्षेत्र W1 से W2 तक गति कराया जाता है। परिपथ में प्रेरित धारा है
व्यास 0.1m की किसी लंबी परिनालिका में प्रति मीटर 2 फेरे हैं। परिनालिका के केंद्र पर, 100 फेरों तथा त्रिज्या 0.01m की एक कुंडली इस प्रकार रखी जाती है कि उसकी अक्ष परिनालिका की अक्ष से संपाती हो। परिनालिका में धारा 0.05s में 4A से नियत दर से घटकर 0 A हो जाती है। यदि कुंडली का प्रतिरोध है, तो इस समय के दौरान कुंडली से बहने वाला कुल आवेश है
(c) कुंडली में प्रेरित धारा इस प्रकार दी जाती है
दिया है, परिनालिका का प्रतिरोध,
R=10
दूसरी कुंडली की त्रिज्या r=
कुंडली से बहने वाला आवेश इस प्रकार दिया जाता है
=
=
=
किसी लंबी परिनालिका में 1000 फेरे हैं। जब उससे 4.0 A की धारा बहती है, तो परिनालिका के प्रत्येक फेरे से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स Wb है। परिनालिका का स्वप्रेरकत्व है-
(c) दिया है, परिनालिका के फेरों की संख्या, N=1000.
धारा, I=4A
चुंबकीय फ्लक्स,
अतः, परिनालिका का स्वप्रेरण इस प्रकार दिया जाता है
...(1)
दिए गए मान समीकरण (1) में रखने पर, हमें प्राप्त होता है
प्रतिरोध 400 की कोई कुंडली किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखी है। यदि कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स समय t (sec) के साथ के अनुसार परिवर्तित होता है
t=2s पर कुंडली में धारा है
कुंडली का प्रेरित विद्युत वाहक बल E =
दिया है,
कुंडली में धारा
=
कोई चालक वृत्ताकार लूप किसी एकसमान चुंबकीय क्षेत्र, B=0.025 T में अपने तल के लूप के लंबवत रखा गया है। लूप की त्रिज्या 1 की नियत दर से सिकुड़ने दी जाती है। जब त्रिज्या 2cm है, तब प्रेरित विद्युत वाहक बल है
चुंबकीय फ्लक्स
=
प्रेरित विद्युत वाहक बल,
=
किसी लंबी परिनालिका में 500 फेरे हैं। जब उससे 2 A की धारा प्रवाहित की जाती है, तो परिनालिका के प्रत्येक फेरे से संबद्ध परिणामी चुंबकीय फ्लक्स Wh है। परिनालिका का स्वप्रेरकत्व है
किसी कुंडली का प्रेरकत्व संख्यात्मक रूप से उस कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल के बराबर होता है जब कुंडली में धारा 1 की दर से बदलती है। यदि I परिपथ में बहती धारा है, तो परिपथ से संबद्ध फ्लक्स i के अनुक्रमानुपाती पाया जाता है, अर्थात्,
जहाँ L को कुंडली का स्वप्रेरकत्व अथवा स्वप्रेरण गुणांक अथवा केवल प्रेरकत्व कहा जाता है।
परिनालिका से कुल फ्लक्स,
कोई रेलगाड़ी किसी क्षैतिज तल पर 72 km/hr की दर से गति कर रही है। यदि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक 0.345 A/m है तथा नति कोण 30° है, तो लंबाई 1.7 m के किसी डिब्बे के दोनों सिरों के बीच विभवांतर होगा-
प्रति cm 1000 फेरों वाली कोई लंबी परिनालिका एक ऐम्पियर शिखर मान की प्रत्यावर्ती धारा वहन कर रही है। अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल तथा 20 फेरों वाली एक खोजी कुंडली परिनालिका के मध्य में इस प्रकार रखी जाती है कि उसका तल परिनालिका की अक्ष के लंबवत हो। खोजी कुंडली शिखर वोल्टता दर्ज करती है। परिनालिका में धारा की आवृत्ति है -
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