पृथ्वी की सतह के निकट पृथ्वी के उपग्रह का कक्षीय वेग 7 km/s है। जब कक्षा की त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या की 4 गुना हो, तो उस कक्षा में कक्षीय वेग है
(a) यदि कक्षीय त्रिज्या 4 गुना हो जाए तो कक्षीय वेग
आधा हो जाएगा। अर्थात्
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पृथ्वी की सतह के निकट पृथ्वी के उपग्रह का कक्षीय वेग 7 km/s है। जब कक्षा की त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या की 4 गुना हो, तो उस कक्षा में कक्षीय वेग है
(a) यदि कक्षीय त्रिज्या 4 गुना हो जाए तो कक्षीय वेग
आधा हो जाएगा। अर्थात्
सूर्य से पृथ्वी की अधिकतम तथा न्यूनतम दूरियाँ तथा हैं, सूर्य से खींचे गए कक्षा के दीर्घ अक्ष के लंबवत होने पर सूर्य से उसकी दूरी
(c) पृथ्वी सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय पथ में गति करती है। अतः दीर्घवृत्त के गुणों का उपयोग करके
जहाँ a = अर्ध दीर्घ अक्ष
b = अर्ध लघु अक्ष
e = उत्केंद्रता
अब अभीष्ट दूरी = अर्ध नाभिलंब=
=
कल्पना कीजिए कि कोई हल्का ग्रह किसी अत्यंत भारी तारे के चारों ओर त्रिज्या R की वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमण काल T के साथ परिक्रमा कर रहा है। यदि ग्रह तथा तारे के बीच गुरुत्वीय आकर्षण बल के अनुक्रमानुपाती है, तो किसके अनुक्रमानुपाती है
(b) ग्रह की परिक्रमा के लिए अभिकेंद्री बल गुरुत्वीय आकर्षण बल द्वारा प्रदान किया जाता है
दो सर्वसम उपग्रह पृथ्वी की सतह से R तथा 7R दूर हैं, गलत कथन है (R = पृथ्वी की त्रिज्या)
(d) उपग्रहों की कक्षीय त्रिज्या
तथा
तथा
तथा
पृथ्वी की औसत त्रिज्या R है, अपनी अक्ष पर उसकी कोणीय चाल है तथा पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण g है। किसी भूस्थिर उपग्रह की कक्षा की त्रिज्या का घन होगा -
(d) कक्षीय वेग तथा
इससे प्राप्त होता है
कोई उपग्रह जिसका द्रव्यमान M है, पृथ्वी के चारों ओर त्रिज्या r की वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। उपग्रह का परिक्रमण काल है
(b)
समीकरण (2) से v का मान समीकरण (1) में रखने पर
मान लीजिए गुरुत्वीय बल दूरी की घात के व्युत्क्रमानुपाती है। तो सूर्य के चारों ओर त्रिज्या R की वृत्ताकार कक्षा में किसी ग्रह का आवर्तकाल किसके अनुक्रमानुपाती होगा -
(a)
पृथ्वी की सतह के अत्यंत निकट किसी कृत्रिम उपग्रह की कक्षीय चाल है। तो पृथ्वी की त्रिज्या के तीन गुना के बराबर ऊँचाई पर किसी अन्य कृत्रिम उपग्रह की कक्षीय चाल है
(c) यदि तो
यदि तो
विषुवत रेखा पर प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण शून्य करने के लिए, पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः घूर्णन का कोणीय वेग होना चाहिए (g=10 तथा पृथ्वी की त्रिज्या 6400 kms है)
(b)
विषुवत रेखा पर भारहीनता के लिए तथा
द्रव्यमान M का एक रॉकेट पृथ्वी की सतह से प्रारंभिक चाल V के साथ ऊर्ध्वाधर रूप से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वी की त्रिज्या R तथा वायु प्रतिरोध नगण्य मानते हुए, पृथ्वी की सतह से ऊपर रॉकेट द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई है
(c)
...(i)
साथ ही ...(ii)
(i) तथा (ii) हल करने पर
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