भौतिक विज्ञान (Physics) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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एक हाइड्रोलिक तंत्र में, बड़े पिस्टन पर बल ($F_2$) छोटे पिस्टन पर बल ($F_1$) से गुणक $A_2/A_1$ द्वारा संबंधित है। यदि $A_2 = 10 A_1$, तो बल प्रवर्धन है:

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पाठ इंगित करता है कि बल '$A_2/A_1$ के गुणक से बढ़ गया है'। यदि $A_2 = 10 A_1$, तो गुणक $10A_1/A_1 = 10$ है। अतः बल 10 गुना प्रवर्धित होता है।

दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले अभिलंब बल के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका SI मात्रक और विमा क्या है?

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पाठ कहता है, 'दाब का SI मात्रक N m$^{-2}$ है। इसे पास्कल (Pa) नाम दिया गया है'। साथ ही, इसकी विमाएँ '[ML$^{-1}$T$^{-2}$]' हैं।

किरखोफ का संधि नियम किस भौतिक राशि के संरक्षण का प्रत्यक्ष परिणाम है?

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दिए गए पाठ के अनुसार, 'किरखोफ का संधि नियम आवेश संरक्षण पर आधारित है और किसी संधि पर बाहर जाने वाली धाराओं का योग आने वाली धारा के बराबर होता है।' यह रेखांकित करता है कि यह नियम, जो कहता है कि संधि में प्रवेश करने वाली धाराओं का योग बाहर जाने वाली धाराओं के योग के बराबर है, मूलतः इस बारे में है कि किसी बिंदु पर आवेश संचित नहीं होता, अर्थात् आवेश संरक्षण।

किरखोफ का कौन-सा नियम कहता है कि किसी भी बंद पाश के चारों ओर विभव में परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होना चाहिए?

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NCERT पाठ स्पष्ट रूप से कहता है, '(b) पाश नियम: प्रतिरोधकों और सेलों वाले किसी भी बंद पाश के चारों ओर विभव में परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है'। यह नियम ऊर्जा संरक्षण का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग है, क्योंकि विभवांतर प्रति इकाई आवेश किए गए कार्य से संबंधित है।

किसी प्रतिरोधक में धारा 'I' के लिए दिशायुक्त तीर अंकित करते समय, यदि गणना के बाद 'I' ऋणात्मक निकले, तो इसका क्या अर्थ है?

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पाठ समझाता है: 'यदि अंततः I धनात्मक निर्धारित हो, तो प्रतिरोधक में वास्तविक धारा तीर की दिशा में है। यदि I ऋणात्मक निकले, तो धारा वास्तव में तीर के विपरीत दिशा में बहती है।'

emf $e$ और आंतरिक प्रतिरोध $r$ वाले सेल के लिए, यदि धारा $I$ सेल के भीतर ऋणात्मक टर्मिनल (N) से धनात्मक टर्मिनल (P) की ओर बहती है, तो विभवांतर $V = V(P) - V(N)$ क्या है?

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संदर्भ कहता है, 'V = V(P) – V(N) = e – I r [समीकरण (3.38) धनात्मक टर्मिनल P और ऋणात्मक टर्मिनल N के बीच; यहाँ I सेल के भीतर N से P की ओर बहने वाली धारा है]।'

किरखोफ के नियमों का उपयोग करके विद्युत परिपथों के विश्लेषण में, कब यह कहा जाता है कि किसी संधि या बिंदु पर आवेशों का संचय नहीं होता?

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NCERT पाठ स्पष्ट करता है: 'इस नियम [संधि नियम] की उपपत्ति इस तथ्य से मिलती है कि जब धाराएँ अपरिवर्ती होती हैं, तो किसी संधि या रेखा के किसी बिंदु पर आवेशों का संचय नहीं होता।'

किरखोफ के नियमों को 'विद्युत परिपथों के विश्लेषण के लिए बहुत उपयोगी' क्यों माना जाता है?

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अनुच्छेद कहता है, 'प्रतिरोधकों के श्रेणी और समांतर संयोजनों के लिए हमने जो सूत्र पहले व्युत्पन्न किए हैं, वे परिपथ में सभी धाराओं और विभवांतरों को निर्धारित करने के लिए सदैव पर्याप्त नहीं होते। किरखोफ के नियम कहलाने वाले दो नियम विद्युत परिपथों के विश्लेषण के लिए बहुत उपयोगी हैं।'

'n' संभावित पाशों वाले परिपथ पर किरखोफ का द्वितीय नियम (पाश नियम) लागू करके सामान्यतः कितने स्वतंत्र समीकरण प्राप्त किए जा सकते हैं?

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यद्यपि सूत्र के रूप में स्पष्ट नहीं कहा गया है, उदाहरण 3.6 दर्शाता है कि अज्ञातों को हल करने के लिए पर्याप्त संख्या में स्वतंत्र समीकरण बन जाने के बाद शेष बंद पाशों पर पाश नियम लागू करना 'कोई अतिरिक्त स्वतंत्र समीकरण नहीं देता'। पाश नियम से स्वतंत्र समीकरणों की संख्या सामान्यतः उन अज्ञात धाराओं की संख्या के बराबर होती है जिन्हें संधि नियम से निर्धारित नहीं किया जा सकता।

किरखोफ के संधि नियम के अनुसार, यदि धाराएँ $I_1$ और $I_2$ किसी संधि में प्रवेश करती हैं और $I_3$ संधि से बाहर जाती है, तथा कोई अन्य धारा नहीं है, तो उनके बीच क्या संबंध है?

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संधि नियम कहता है: 'किसी भी संधि पर, संधि में प्रवेश करने वाली धाराओं का योग संधि से बाहर जाने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है।' अतः यदि $I_1$ और $I_2$ प्रवेश करती हैं और $I_3$ बाहर जाती है, तो $I_1 + I_2 = I_3$।

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